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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाक के बीच बढ़ा तनाव

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الخميس، 22 مايو 2025

 


भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है। इसकी वजह है भारत द्वारा हाल ही में चलाया गया एक सैन्य अभियान, जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' कहा गया। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान सीमा के पार आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया।

भारतीय सेना के अनुसार, यह ऑपरेशन एक विशेष मिशन था जिसमें उन आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया जो भारत पर हमले की योजना बना रहे थे। सेना का कहना है कि यह कार्रवाई सटीक और सफल रही। देशभर में लोगों ने भारतीय सेना और सरकार की इस कड़ी कार्रवाई की सराहना की है।

वहीं पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन का कड़ा विरोध किया है। पाकिस्तान की सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे हमले दोबारा हुए तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और भी बढ़ गया है।

सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। कई जगहों पर स्कूल और बाजार एहतियातन बंद कर दिए गए हैं।

इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सीजफायर (गोलीबारी बंद) का श्रेय उन्हें जाता है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने दोनों देशों के बीच शांति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

हालांकि, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान से सीधे बातचीत के जरिए शांति की दिशा में कदम बढ़ाया और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी।

फिलहाल, दोनों देशों के बीच माहौल बहुत नाजुक बना हुआ है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह तनाव किसी बड़े टकराव में न बदले। सरकार और सेना स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

अब हिंदी में भी कर सकेंगे एमबीबीएस की पढ़ाई

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الأربعاء، 12 أكتوبر 2022



नई दिल्ली। अमित शाह के विमोचन के बाद ही मध्यप्रदेश में हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। पिछले कई दिनों से मध्य प्रदेश की सरकार लगातार इस पर काम कर रही है। देश में यह पहली बार होगा जब किसी राज्य में एमबीबीएस को लेकर हिंदी में पढ़ाई हो रही होगी। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह 16 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरान वह भोपाल में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की हिंदी में अनुवादित पुस्तकों का विमोचन करेंगे। इसका मतलब साफ है कि अब मेडिकल की पढ़ाई भी हिंदी में हो सकेगी। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को बड़ी सौगात दे रही है। यह उन छात्रों के लिए बड़ी बात है जो हिंदी में अपनी पढ़ाई को जारी रखना चाहते हैं। अमित शाह के विमोचन के बाद ही मध्यप्रदेश में हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। पिछले कई दिनों से मध्य प्रदेश की सरकार लगातार इस पर काम कर रही है। देश में यह पहली बार होगा जब किसी राज्य में एमबीबीएस को लेकर हिंदी में पढ़ाई हो रही होगी।  जिन छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई करनी होती है, उनके लिए यह धारणा आम है कि अंग्रेजी आनी चाहिए। लेकिन इस विमोचन के बाद से यह धारणा बदल सकती है। अब मेडिकल की पढ़ाई सिर्फ इंग्लिश में नहीं, हिंदी में भी हो सकती है। कोई भी छात्र जो हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं। उन्हें इस कदम से लाभ मिल सकता है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसे क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं।

और दावा कर रहे हैं कि मध्य प्रदेश में इससे एक नई शुरूआत होगी। इसको लेकर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तमाम तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक अमित शाह एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री और फिजियोलॉजी पर हिंदी में मेडिकल की किताबें जारी करेंगे। शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक संकल्प है कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होना चाहिए।

और इसी वजह से हम इस पर आगे बढ़ रहे हैं। हम उन लोगों के जीवन में नया अभियान लाना चाहते हैं जो अंग्रेजी नहीं जानते हैं। शिवराज ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 16 अक्टूबर को मध्यप्रदेश आ रहे हैं। हमारा मध्यप्रदेश देश में पहला राज्य होगा, जहां मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में किए जाने की शुरूआत होगी। 



बच्चों को आॅनलाइन रखना है सेफ? ये टिप्स आएंगे काम

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السبت، 24 سبتمبر 2022



आज भारत में बाल दिवस मनाया जा रहा है। डिजिटलाइजेशन के दौर में अब बच्चे टेक्नॉलजी का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। फेसबुक, ट्विटर हो या फिर इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप, बच्चे हर जगह इन प्लैटफॉर्म्स काफी ज्यादा ऐक्टिव हैं। इसके फायदे हैं तो नुकसान भी। पैरंट्स के लिए जरूरी है कि वे अपने बच्चों को आॅनलाइन सेफ रखें। इस गैलरी के जरिए हम कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं कि पैरंट्स कैसे अपने बच्चों को आॅनलाइन सेफ रख सकते हैं...

लोकेशन परमिशन

कुछ भी पोस्ट करने से पहले एक बार सोचें। याद रखें कि पोस्ट होने के बाद उसे सभी देखेंगे। ऐसे में अगर आप अपने पैरंट्स, टीचर या फ्यूचर एंप्लॉयर के साथ सहज नहीं होंगे जो कि उस पोस्ट को पढ़ रहे हैं तो शायद यह आॅनलाइन नहीं होना चाहिए।

सोच-समझकर शेयर करें

चाहे आप किसी से बात कर रहे हों या कोई ऐप या सर्विस यूज कर रहे हों, अपनी पर्सनल इन्फर्मेशन जैसे आपका पूरा नाम, बर्थडेट और आपकी लोकेशन जैसे आप कहां रहते हैं या दोस्तों के साथ हैंगआउट करने कहां जाते हैं, जैसी चीजों को प्रॉटेक्ट करना मुश्किल है।

हमेशा यूज करें पासवर्ड मैनेजर

हर सर्विस या ऐप में एक ही पासवर्ड रखना ठीक नहीं है। इसका हल भी आसान है। हर साइट या ऐप जिसका आप इस्तेमाल करते हों, के यूनीक और स्ट्रॉन्ग पासवर्ड रखें। इसके लिए आप अपने ब्राउजर या मोबाइल के बिल्ट इन पासवर्ड मैनेजर या थर्ड पार्टी मैनेजर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

टू फैक्टर अथेंटिकेशन

अपने फोन या जिस भी डिवाइस को आप यूज कर रहे हों, उसे पासवर्ड से प्रॉटेक्ट करें। यही नहीं, जब आप इनका इस्तेमाल न कर रहे हों तो लॉक कर दें। हैकर्स दूर रहें, इसके लिए अपने अकाउंट्स में 2थ्। का यूज करें।

क्लिक करने से पहले चेक करें

जो भी चीजें आपको देखने में संदिग्ध लगे, उस पर क्लिक न करें। अगर आपको कुछ अजीब लग रहा है तो पैरंट्स या टीचर से पूछें कि उसे क्लिक करना सही रहेगा या नहीं।

हमेशा लॉग आउट करें

जब भी अपने कंप्यूटर, फोन या किसी दूसरे डिवाइस से दूर जाएं, उसे लॉग आउट करना न भूलें।


मोबाइल पर कम खर्च होगा डेटा, अपनाएं काम की 8 टिप्स

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पिछले कुछ सालों में मोबाइल पर डेटा की खपत तेजी से बढ़ी है। स्मार्टफोन यूजर्स अपने ज्यादातर काम आॅनलाइन ही कर रहे हैं। आज लगभग हर छोटे-बड़े काम के लिए ऐप्स उपलब्ध हैं। ये ऐप्स भी लगातार अपडेट होते हैं, जिनमें यूजर का काफी डेटा खर्च होता है। इसके अलावा, भारत में विडियो स्ट्रीमिंग सर्विसेज भी तेजी से पॉप्युलर हुई हैं। ऐसे में यूजर की डेटा की जरूरतें लगातार बढ़ रही है। यहां हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहें जिनसे आप अपने मोबाइल में इंटरनेट का इस्तेमाल करने के साथ डेटा की बचत कर सकते हैं।

अपनी डेटा लिमिट सेट करें

अपने ऐंड्रॉयड फोन में डेटा के लिए लिमिट सेट करके आप अपना डेटा यूज ट्रैक कर सकते हैं। डेटा लिमिट सेट करने के लिए अपने ऐंड्रॉयड फोन की सेटिंग में जाएं। सेटिंग्स में डेटा यूजेज आॅप्शन पर टैप करें, फिर बिलिंग साइकल में जाएं इसके बाद डेटा लिमिट और बिलिंग साइकल पर टैप करके आप डेटा लिमिट सेट कर सकते हैं।

बैकग्राउंड डेटा रिस्ट्रिक्ट करें

कई ऐप्स फोन के बैकग्राउंड में मोबाइल डेटा कंज्यूम करते रहते हैं। ऐसे में जिन ऐप्स को बैकग्राउंड में रन करने की जरूरत नहीं है, उन्हें आप सेटिंग्स में जाकर डेटा यूजेज में ह्यरिस्ट्रिक्ट ऐप बैकग्राउंड डेटाह्ण पर टैप करके बैकग्राउंड में डेटा खर्च होने से बचा सकते हैं।

डेटा कंप्रेशन का यूज करें

गूगल क्रोम सबसे पॉप्युलर ऐप्स में से एक है। इस ऐप में डेटा कंप्रेशन का आॅप्शन इंबिल्ट होता है। इसके लिए आपको दायीं तरफ कॉर्नर में तीन डॉट नजर आएंगे उन पर टैप करके सेटिंग्स में जाकर डेटा सेवर आॅप्शन पर टैप करके उसे आॅन करें।

अपडेट के लिए वाई-फाई का करें इस्तेमाल

अपने स्मार्टफोन में ऐप्स को अपडेट करने के लिए वाई फाई का इस्तेमाल करने से आप डेटा की बचत कर सकते हैं। इसके लिए आप फोन के मेन्यू में जाकर सेटिंग्स में जाएं और ह्यआॅटो अपडेट ऐप्स ओवर वाई-फाई ओनलीह्ण आॅप्शन पर टैप करें।

फोन में स्टोर करें विडियो और म्यूजिक

स्ट्रीमिंग सर्विस का यूज कम करें

स्मार्टफोन पर म्यूजिक और विडियो स्ट्रीमिंग करने में सबसे ज्यादा डेटा खर्च होता है। ऐसे में आप विडियो और म्यूजिक अगर फोन में लोकली स्टोर करते हैं तो आप डेटा की बचत कर सकते हैं।

आॅफलाइन मैप का इस्तेमाल करें

गूगल मैप्स एक पॉप्युलर सर्विस है। इसके इस्तेमाल में यूजर का काफी डेटा खर्च होता है। ऐसे में डेटा बचाने के लिए आप मैप्स को सेव कर सकते हैं। मैप डाउनलोड होने के बाद आप ळच्ै की मदद से इसका इस्तेमाल आॅफलाइन कर सकते हैं।

मैलवेयर को रखें दूर

ऐंड्रॉयड फोन में मैलवेयर (वायरस) के चलते भी आपका ज्यादा डेटा खर्च हो सकता है। इसके लिए यूजर को अपने फोन को स्कैन करते रहना चाहिए। इसके लिए किसी अच्छे एंटीवायरस ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

जरूरत न होने पर डेटा आॅफ कर दें

जिस वक्त आप फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं या आॅफलाइन सर्विस यूज कर रहे हैं उस वक्त डेटा आॅफ कर दें। इस तरह आप काफी मोबाइल डेटा सेव कर सकेंगे। 



वाईफाई कनेक्ट होने के बाद भी आ रही परेशानी तो करें ये काम

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الاثنين، 19 سبتمبر 2022

 


कई बार वाईफाई लोगों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। दरअसल, कभी-कभी वाईफाई कनेक्ट तो हो जाता है लेकिन यूजर्स को इंटरनेट की गति में समस्या आ जाती है या फिर नेट चलना भी बन्द हो जाता है। ऐसे में यूजर्स को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। स्मार्टफोन्स में वाईफाई को प्रयोग में लाना आम बात है। लेकिन कई बार यह लोगों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। दरअसल, कभी-कभी वाईफाई कनेक्ट तो हो जाता है लेकिन यूजर्स को इंटरनेट की गति में समस्या आ जाती है या फिर नेट चलना भी बन्द हो जाता है। यदि आप भी ऐसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसी तीन सेंटिंग जिसके बाद आप अपने फोन में वाईफाई के जरिये बिना किसी परेशानी के इंटरनेट को प्रयोग कर सकते हैं।

1. सबसे पहले आप वाईफाई को बन्द करके दोबारा आॅन कीजिये। इसके बाद आप इंटरनेट की गति को चेक कर सकते हैं।

2. यदि आॅन-आॅफ करने के बाद भी यह समस्या ठीक नहीं होती है तब आपको वाईफाई की सेंटिग खोलनी है उसके बाद आप जिस नेटवर्क को कनेक्ट करना चाहते हैं उसको फॉरगेट कर करना होगा। फॉरगेट करने के बाद आप इस नेटवर्क को दोबारा से सर्च करके कनेक्ट कर सकते हैं। ऐसा करने से इस समस्या को काफी हद तक सुलझाया जा सकता है। 

3. यदि आप राउटर से इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं। तो एक बार राउटर को आॅफ करके दोबारा से आॅन कर सकते हैं। कई बार राउटर की समस्या के कारण भी इंटरनेट की गति में समस्या का सामना करना पड़ता है। 



अप्लाइड साइंस में भी करियर का जबर्दस्त मौका, जानें सबकुछ

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الأحد، 18 سبتمبر 2022

 


12वीं बाद पढ़ाई के ट्रेंड को अगर देखें तो ज्यादातर लोग बीटेक ही करते हैं। लोगों की सोच यह कि बीटेक से जो बचते हैं, वे ही बीएससी का रुख करते हैं यानी बीएससी उनकी पहली चॉइस नहीं होती लेकिन मजबूरन उन्हें इसमें ऐडमिशन लेना पड़ता है। अगर आपकी भी सोच यही है तो जान लीजिए, आप भ्रम में हैं। बीएससी अपने आप में एक ऐसी डिग्री है जो करियर में आगे एक नहीं वरन कई रास्ते खोलती है। 

वर्तमान समय में कई नई डिग्रियों के बीच बीएससी की परंपरागत डिग्री भले ही थोड़ी ह्यओल्ड फैशन्डह्ण मानी जाती हो मगर असल में इस परंपरागत डिग्री के बाद आगे पढ़ाई करने के साथ-साथ जॉब के लिए भी कई आकर्षक राहें खुलती हैं। जरूरत है तो बस सब्जेक्ट पर अच्छे से पकड़ बनाकर उसके सब्जेक्ट्स के अप्लाइड पार्ट पर काम करने की। आपका करियर बनाने में बीएससी कैसे काम आ सकती है, विशेषज्ञों से मिलकर जाना गौतम तिवारी ने पूरा हाल...

अप्लाइड साइंस देगी मौका

बीएससी का मतलब सिर्फ फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, बायॉलजी ही नहीं है। अप्लाइड साइंस के कई ऐसे सब्जेक्ट्स हैं जिनमें बीएससी करके आप आसानी से अपना करियर बना सकते हैं। ऐसे कुछ उपयोगी विषय हैं...कम्प्यूटर साइंस, माइक्रोबायॉलजी, ऐनिमेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, न्यूट्रिशन, बायॉइन्फर्मेटिक्स, बायॉकेमिस्ट्री, मल्टीमीडिया, इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी, ऐविएशन, अग्रीकल्चर, साइकॉलजी, जेनेटिक्स, फरेन्सिक साइंस, फैशन टेक्नॉलजी, नर्सिंग, फूड टेक्नॉलजी, फॉरेस्ट्री, एक्वाकल्चर, फिजियोथेरपी आदि।

इनमें से किसी विषय में बीएससी करने के बाद उससे संबंधित क्षेत्र में कई तरह के अवसर खुल जाते हैं। बीएससी के बाद कोई स्किल-बेस्ड शॉर्ट-टर्म टेक्निकल कोर्स भी कर सकते हैं। जैसे एसएपी, जावा, एसक्यूएल, फाइनैंशल अकाउंटिंग आदि। इंडस्ट्रीज में ऐसे प्रफेशनल्स की मांग रहती है। बीएससी ग्रैजुएट्स को भी कई सेक्टर में अच्छी कमाई व भविष्य के लिए आकर्षक संभावनाओं वाली जॉब मिल सकती है। ये इंडस्ट्रीज हैं-हेल्थ केयर सर्विस प्रोवाइडर्स, स्पेस रिसर्च इंस्टिट्यूट्स, अग्रीकल्चर इंडस्ट्री, फामार्सूटिकल्स ऐंड बायॉटेक्नॉलजी इंडस्ट्री, आॅइल इंडस्ट्री, रिसर्च फर्म्स, इंडस्ट्रियल लैबोरेट्रीज, टेस्टिंग लैबोरेट्रीज, हॉस्पिटल, फूड इंडस्ट्री, केमिकल इंडस्ट्री आदि।

बीएससी के बाद डिप्लोमा कोर्स

बीएससी के बाद कुछ अच्छे डिप्लोमा कोर्स कर के भी आप आसानी से अपना करियर बना सकते हैं। ये डिप्लोमा कोर्स इस प्रकार हैं...

-पी.जी डिप्लोमा इन प्रिवेंटिव ऐंड प्रोमोटिव हेल्थ केयर

-पी.जी डिप्लोमा इन इंस्ट्रक्शनल डिजाइन 

-पी.जी डिप्लोमा इन केमो-इंफर्मेटिक्स

-इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ रियल एस्टेट -प्रिंसिपल्स ऐंड प्रैक्टिसेज आॅफ रियल एस्टेट

-मास्टर आॅफ साइंस इन काउंसलिंग ऐंड फैमिली थेरपी 

बीएससी बाद पोस्ट ग्रैजुएशन भी विकल्प

यदि आप बीएससी करने के बाद पोस्ट ग्रैजुएशन करना चाहते हैं तो आप एमएससी कर सकते हैं। बीएससी में अगर आपके पास मैथ्स है तो मैथ्स से एमएससी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। अगर बायो, फॉरेस्ट्री, जूलॉजी जैसे सब्जेक्ट हैं तो भी एमएससी बेहतर विकल्प है।

बीएससी के बाद पोस्ट ग्रैजुएशन में सिर्फ एमएससी ही विकल्प नहीं बल्कि एमबीए करके मैनेजमेंट के क्षेत्र में, एमसीए करके आईटी के क्षेत्र में या फिर बीएड करके एजुकेशन के क्षेत्र में भी जा सकते हैं।

बीएससी बाद हॉबी कोर्सेस भी देते हैं करियर

जरूरी नहीं कि बीएससी के बाद आईटीआई या डिप्लोमा से जुड़े कोर्स करना ही पसन्द करें। छात्र अपने हॉबी के अनुसार भी कोर्सेस कर सकते हैं। जैसे ऐनीमेशन, फिल्म डिजाइनिंग और फॉरेन लैंग्वेज कोर्सेज

राइटिंग ऐंड जर्नलिज्म कोर्सेज (बतौर विज्ञान पत्रकार)

सरकारी और निजी जॉब में भी रहते हैं कई मौके बीएससी के बाद या तो आप आगे पढ़ाई कर सकते हैं यदि आप चाहे तो बीएससी के बाद जॉब भी कर सकते हैं। यदि आप बीएससी के बाद सरकारी या प्राइवेट नौकरी करना चाहते हैं तो आपके पास जॉब के लिए कई एग्जाम दे सकते हैं।

इंटीग्रेटेड एमएससी भी है बीएससी का विकल्प

मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे विषयों में अगर आपकी रूचि है और रिसर्च या अकेडमिक्स में आपकी रूचि है तो बीएससी की जगह इंटीग्रेटेड एमएससी को तरजीह देना फायदेमंद हो सकता है। इंट्रीग्रेटेड एमएससी पांच साल का कोर्स होता है। इसमें ऐडमिशन नेस्ट परीक्षा के जरिए आॅल इंडिया लेवल पर होते हैं। यह इंटर के बाद किया जा सकता है जिसमें बीएससी और एमएससी आप एक साथ पढ़ कर निकलते हैं। हालांकि कुछ निजी कॉलेज भी अब इंटिग्रेटिड एमएससी करा रहे हैं। 



प्रकृति प्रेमियों के लिए शानदार करियर आॅप्शन है मेटियोरोलॉजी

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मेटियोरोलॉजी अर्थात मौसम विज्ञान के अंतर्गत मौसम की पूरी प्रक्रिया तथा मौसम का पूवार्नुमान आदि का विस्तृत अध्ययन किया जाता है. मौसम विज्ञान की सही जानकारी से कई प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान माल की अपार क्षति से बचा जा सकता है. एक मौसम विज्ञानी आंधी,तूफान, चक्रवात तथा बवंडर आदि घटनाओं की जानकारी पहले ही दे देते हैं जिससे रेड एलर्ट कर जान माल के नुकसान को कम किया जा सकता है. 

इसलिए आजकल मौसम विज्ञान विषय तथा इसकी पढ़ाई करने वाले लोगों की मांग बढ़ गयी है. इसका अध्ययन भूगोल विषय के अंतर्गत किया जाता है.वस्तुत: मेटियोरोलॉजी शब्द ग्रीक शब्द ह्यमिटिऔरलह्ण से बना है जिसका अर्थ होता है आकाश में घटित होने वाली कोई घटना.इस क्षेत्र के स्पेशलिस्ट को मौसम विज्ञानी या जलवायु विज्ञानी अथवा वायुमंडल वैज्ञानिक कहा जाता है. मौसम विज्ञान वायुमण्डल विज्ञान की एक शाखा है जो मुख्य रूप से मौसम एवं जलवायु के पूवार्नुमान तथा हमारे पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करता है.

विशेषताएं और योग्यता

-किसी भी मौसम विज्ञानी को गणित एवं भौतिकी विषयों का अच्छा ज्ञान होना चाहिए तथा पर्यावरण को जानने की उत्कट इच्छा होनी चाहिए. उन्हें प्रॉब्लम सॉल्विंग. डिसीजन मेकिंग, डेटा एनालिसिस तथा कम्युनिकेशन स्किल में प्रवीण होना चाहिए. टेक्नोलॉजी के आज के युग में ज्यादातर मौसम विज्ञानी अपने कार्यों में उच्च टेक्नोलॉजी तथा सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, इसलिये उनका कम्प्यूटर और टेक्नोलॉजी नॉलेज भी बहुत अच्छा होना चाहिए.

-मौसम विज्ञान का अध्ययन करने वाले छात्र अपने कुछ वर्ष के अनुभवों के आधार पर ही वर्षा, तापमान, दबाव तथा नमी आदि का सही सही अनुमान लगा सकते हैं. मौसम विज्ञान के क्षेत्र में कई ऐसे इंटररिलेटेड फील्ड हैं जिनमें पर्याप्त रिसर्च की आवश्यकता है और उम्मीदवार चाहें तो अपनी रूचि के अनुसार इस फील्ड में अपना एक आकर्षक करियर बना सकते हैं. वेदर साइंस अर्थात मौसम विज्ञान में रुचि रखने वाले उम्मीदवार इस फील्ड में अपना भविष्य बनाने की सोच सकते हैं. लेकिन उन्हें यह भी जानना चाहिए कि मौसम पूवार्नुमान कोई निश्चित घंटों वाला आॅफिस वर्क नहीं है. अगर आवश्यकता पड़ी तो एक मौसम विज्ञानी को सप्ताह में सातों दिन और किसी भी वक्त कार्य करना पड़ सकता है. यहाँ तक कि छुट्टी के दिन या त्योहारों पर भी उन्हें कार्य करना पड़ सकता है. इअलिये जिन लोगों  को तरह-तरह के मौसमों, बादलों, बारिश के रहस्यों से लेकर यदि मौसम के पूवार्नुमान और जलवायु परिवर्तन के प्रति उत्कंठा रहती है तो वे मौसम विज्ञान में एक आकर्षक करियर की तलाश कर सकते हैं.

-पूरे विश्व में बढ़ते प्रदूषण के कारण मौसम का मिजाज भी निरन्तर बदलता जा रहा है. हर रोज विश्व में कहीं न कहीं प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप सुनाई या दिखाई देता है. ऐसी स्थिति में एक मौसम विज्ञानी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है.

-मौसम विज्ञानी बनने के लिए विज्ञान विषयों के साथ 10़2 पास करने के बाद बी.एस.सी.की डिग्री अनिवार्य योग्यता है.इसके बाद इस विषय में मास्टर डिग्री भी की जा सकती है.इस क्षेत्र में रिसर्चर अथवा वैज्ञानिक बनने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों को यूजीसी नेट एग्जाम क्वालीफाई करने के बाद मौसम विज्ञान में पी.एच.डी. करनी होगी.

-वैसे मौसम विज्ञानं में एक वर्ष का डिप्लोमा कोर्स भी कराया जाता है लेकिन इस फील्ड में करियर बनाने वाले सीरियस उम्मीदवारों को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने ग्रेजुएशन डिग्री को ही वरीयता दें. डिप्लोमा कोर्स मुख्यत: फिजिक्स या मैथ्स से ग्रेजुएशन करने वाले उम्मीदवारों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहता है.

मौसम विज्ञानी का कार्य -

-मौसम विज्ञानी मौसम की स्थितियों का  पूवार्नुमान लगाने के लिये बहुत सारे उपकरणों का प्रयोग करते हैं, जैसे हवा का तापमान नापने के लिये थमार्मीटर, हवा की गति को नापने के लिये ऐनेमोमीटर, वायुमंडल के दबाव को नापने के लिये बैरोमीटर, बारिश को नापने के लिये रेनगॉज आदि और इनसे मिले संकेतों के आधार पर अपनी टिप्पणी देते हैं.आजकल  मौसम के पूवार्नुमान में तो उपग्रह तथा डोपल राडार जैसे साधनों का भी उपयोग किया जाने लगा है.

-उपग्रह बादलों की स्थिति को दशार्ते हैं तथा इनके जरिये मौसम प्रणालियों का अध्ययन किया जा सकता है. पूरे संसार यानी सभी महासागरों तथा उप-महाद्वीपों का मौसम देख सकने के कारण उपग्रहों के पास एक विस्तृत डेटा होता है और उसकी मदद से मौसम विज्ञानी तूफान और चक्रवात जैसी मौसम की घटनाओं का सही अनुमान लगा सकने में सक्षम हो सकते हैं.

-इसके अतिरिक्त डॉपलर राडार में ध्वनि तरंगें एक राडार एंटिना के माध्यम से प्रसारित होती हैं और उनसे मुख्य रूप से प्रतिबिम्ब प्राप्त किया जाता है. सबसे अच्छी बात यह है कि जब वे आइस क्रिस्टल या धूल के कणों जैसी किसी वस्तु के सम्पर्क में आते हैं तो उनकी ध्वनि-तरंगों की फ्रीक्वेंसी परिवर्तित हो जाती है और इस संकेत से किसी तूफान के विषय में मौसम विज्ञानियों को बहुत सारी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है.

-नित्य प्रति के मौसम की जानकारी के लिए उपग्रह को प्रक्षेपित कर मौसम केंद्र में स्थापित किया जाता है. इस सन्दर्भ में विशेष रूप से वेदर बैलून का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए लोकल मौसम वेधशालाएँ भी स्थापित की जाती हैं.

स्पेशलाइजेशन फील्ड

एक मौसम विज्ञानी बनने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार डायनामिक मौसम विज्ञान,, भौतिकीय मौसम विज्ञान, संक्षिप्त मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान, एयरोलॉजी, एयरोनॉमी, कृषि मौसम विज्ञान, आदि विषयों में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं.


फिजूल कॉल से हैं परेशान तो मोबाइल से इस तरह कर सकते है उन्हें ब्लॉक

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आजकल टेलीमार्केटिंग का चलन जोरों पर है, हालांकि इसके लिए सिर्फ टेलीकॉम कंपनियां ही जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए आप और हम भी जिम्मेदार हैं। आपमे से कई लोगों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना मोबाइल नंबर दे रखा होगा। साथ ही कई बार हम नौकरी की तलाश में सोशल मीडिया पर आए किसी पोस्ट पर कॉमेंट में अपना मोबाइल नंबर दे देते हैं। इसके बाद टेलीमार्केटिंग कंपनियां आपका मोबाइल नंबर इकट्ठा करती हैं और फिर खेल शुरू होता है। तो अब सवाल यह है कि इससे कैसे बचा जाए? 

जियो, एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया के किसी भी नंबर पर स्पैम कॉल ब्लॉक करने के दो तरीके हैं जिनमें से पहला एसएमएस का तरीका है और दूसरा कॉलिंग का है। यदि आप अपने मोबाइल नंबर पर आने वाले फालतू के फोन से परेशान हैं तो सबसे पहले अपने फोन के मैसेजिंग ऐप में जाएं। इसके बाद एक मैसेज में स्टार्ट 0 टाइप करके 1909 पर सेंड कर दें। इसके बाद आपके फोन पर किसी प्रकार के फालतू और परेशान करने वाले स्पैम कॉल नहीं आएंगे।

फोन करके ब्लॉक कराएं स्पैम कॉल: यदि आप फोन करके अपने नंबर पर आने वाले स्पैम कॉल को ब्लॉक कराना चाहते हैं तो अपने फोन में डायलर ऐप में जाएं और 1909 पर कॉल करें। इसके बाद फोन पर मिलने वाले निदेर्शों का पालन करें और डू नॉट डिस्टर्ब (डीएनडी) सेवा को एक्टिव करें।



सिर्फ दो मिनट में जानिए स्मार्ट फोन की स्पीड बढ़ाने के ये 4 रामबाण टिप्स

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السبت، 17 سبتمبر 2022




स्मार्ट फोन की धीमी गति के कारण यदि आप भी परेशान हैं तो आप ये आसान टिप्स अपनाकर उसकी गति तेज कर सकते हैं। फोन में अगर ढेरों एप्लीकेशन हैं तो पहला काम यह करें कि जिन एप्लीकेशंस का प्रयोग आप नहीं करते हैं उन्हें तुरंत हटा दें। इससे आपके स्मार्ट फोन की स्पीड तेज हो जाएगी। जिस भी ऐप का आप सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उसके कैश को नियमित रूप से डिलीट करते रहें। कैश को हटाने के लिए सबसे पहले सेटिंग्स-एप्स में जाएं। यहां उस ऐप पर क्लिक करें जिसके कैश को क्लियर करना है। क्लिक करने के बाद आपको ह्क्लियर कैश विकल्प पर क्लिक करना है। कैश क्लीन करने के अतिरिक्त स्मार्टफोन में केवल उन्हीं ऐप्स को जगह दें जो आपके काम की हैं। यदि आपके फोन की भी इनबिल्ट स्टोरेज कम है तो सबसे अच्छा विकल्प है कि इंटरनल स्टोरेज में मौजूद तस्वीरें, म्यूजिक और वीडियो फाइल को माइक्रोएसडी कार्ड में मूव कर दें। आपको सेटिंग्स को देखना चाहिए कि कंपनी द्वारा आपके फोन को सॉफ्टवेयर अपडेट तो नहीं मिला है। जांच के लिए सेटिंग्स-सिस्टम-अबाउट-सॉफ्टवेर अपडेटस में जाएं। यदि कोई सॉफ्टवेयर अपडेट मिलता है तो फोन को अपडेट करने से पहले बैकअप जरूर लें। 


फेसबुक मार्केटिंग में करियर बनाने में मदद करेंगे ये टूल्स, होगी अच्छी अर्निंग

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الخميس، 8 سبتمبر 2022


कॉलेज, मार्केट, ट्रेन या फिर बस-स्टॉप, कहीं भी आप जाइए, वहां दिखाई देने वाला एक आम नजारा यह है कि ज्यादातर लोग लगभग हर कुछ मिनट में अपना मोबाइल फोन जरूर चेक करते हैं। वे खबरें पढ़ रहे हों, वाट्सएप मैसेज देख रहे हों या फेसबुक अथवा इंस्टाग्राम पर अपने दोस्तों का सिर्फ स्टेटस चेक कर रहे हों। रिसर्च के मुताबिक, लोग सप्ताह में लगभग एक पूरा दिन केवल सोशल मीडिया पर लगा देते हैं।

अगर इसे दूसरे नजरिए से देखें, तो मोबाइल पर लगाया जाने वाला यह ज्यादा समय विज्ञापनदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होता है, जिन्हें अपने सामान और सेवाओं को बेचने के लिए इन लोगों को टारगेट करना होता है। माना कि हर किसी को सोशल मीडिया और इसके काम करने के तरीके की जानकारी नहीं है, लेकिन यह भी सही है कि इसकी बारीकियां सीखकर आजकल अच्छा पैसा भी कमाया जा सकता है। इसलिए फेसबुक आप जैसे युवाओं के लिए पैसा कमाने और बिजनेस का निर्माण करने का अवसर भी है। आइए जानें, फेसबुक मार्केटिंग में करियर बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए...

टूल्स की समझ: इस फील्ड में आने के लिए ग्रेजुएशन की डिग्री और कारोबार की समझ काफी मददगार साबित होगी। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि फेसबुक मार्केटिंग टूल्स का इस्तेमाल शुरू करने के लिए आपको किसी योग्यता की जरूरत ही नहीं है। हां, यह मीडियम आपको मालूम होना चाहिए। इसके बाद एक फेसबुक बिजनेस एकाउंट खोलिए (जिसमें कोई भी खर्चा नहीं लगता है) और आप कमाई करने या इसे लाभदायक बिजनेस बनाने के लिए फेसबुक मार्केटिंग टूल इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं। 

संसाधन की जरूरत: शुरूआत करने के लिए आपको बस एक इंटरनेट कनेक्शन, फेसबुक पर एक वैलिड बिजनेस एकाउंट और एक क्रेडिट कार्ड (क्योंकि फेसबुक क्रेडिट कार्ड के जरिये पैसे चार्ज करता है) की जरूरत है। बहरहाल, जब आपका बिजनेस बढ़ता है तो आप फेसबुक के साथ फॉर्मल कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं।

टारगेटिंग टूल्स की जानकारी: फेसबुक प्रीसाइज मार्केटिंग टूल्स पेश करती है, जिनमें आप किसी क्लाइंट के लिए लगभग हर लोकेशन पर कैंपेन कर सकते हैं-जैसे, अगर आप दिल्ली में हैं और आप सिर्फ पटपड़गंज को टारगेट करना चाहते हैं या आप इलाहाबाद में हैं और केवल सिविल लाइंस के लोगों को टारगेट करना चाहते हैं तो आप फेसबुक के साथ ऐसा कर सकते हैं। इससे आप आयु वर्ग और जेंडर आधारित टारगेटिंग भी सकते हैं।

तजुर्बा और क्लाइंट की जरूरतें: यह सही है कि कोई भी व्यक्ति फेसबुक मार्केटिंग टूल्स इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है, लेकिन फिर भी मार्केटिंग, सेल्स और प्रोडक्ट डिजाइन की पूर्व जानकारी भी होनी चाहिए। आखिरकार, आप अपने ग्राहकों के लिए कैंपेन करने के लिए इस जानकारी और एप्लीकेशन को इस्तेमाल करेंगे। अगर आपके क्लाइंट्स को नतीजे नहीं मिलते हैं तो आपका बिजनेस आगे नहीं बढ़ेगा।

सर्टिफिकेशंस: जैसे गूगल एडवर्ड्स सर्टिफिकेशन पेश करता है, वैसे ही फेसबुक ब्लूप्रिंट सर्टिफिकेशन कराता है, जो फेसबुक मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग फीचर्स में दिलचस्पी रखने वालों के लिए उपलब्ध है। यह सर्टिफिकेशन दो तरह का है। इसमें मीडिया बाइंग और मीडिया प्लानिंग शामिल हैं।

अगर आपका जीमेल अकाउंट हो गया है हैक तो इस तरह कर सकते है रिकवर

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गूगल की ईमेल सर्विस जीमेल को दुनियाभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। जीमेल को दुनिया भर में एक बिलियन से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं और शायद यही वजह है कि हमेशा हैकर्स की नजर इस ईमेल सर्विस पर बना रहती है। अगर आपने भी अपने जीमेल अकाउंट में किसी संदेहास्पद गतिविधि को नोटिस किया है तो हो सकता है कि आपके अकाउंट को किसी ने हैक कर लिया हो।

1. अकाउंट रिकवरी पेज पर जाएं

2. अगर आपको पासवर्ड याद नहीं है तो अलग-अलग सवालों के जवाब दें।

3. अपने रिकवरी ईमेल या फोन नंबर का इस्तेमाल करें।

4. अब जीमेल आपके अकाउंट के मालिकना हक को सुनिश्चित करने के लिए उस फोन नंबर या ईमेल पर एक रिकवरी कोड भेजेगा।

5. इसके अलावा आप उस सिक्यॉरिटी सवाल का जवाब भी दे सकते हैं, जो आपने अकाउंट सेटअप करते समय बनाया होगा।

6. एक बार रिकवरी कोड रिसीव करने के बाद, जीमेल में इसे एंटर करें और फिर गूगल आपसे पासवर्ड बदलने को कहेग।

7. साइनइन करने के बाद जीमेल आपसे एक बार सिक्यॉरिटी चेक के लिए कहेगा। ध्यान रहे कि सिक्यॉरिटी चेक कर लें और फिर अपनी सिक्यॉरिटी इन्फर्मेशन बदल लें।

आपके जीमेल अकाउंट में की गई कोई हैकिंग ऐक्टिविटी के चलते अगर कोई आपकी जानकारी के बिना आपका गूगल अकाउंट इस्तेमाल कर रहा है तो, आपके दूसरे गूगल अकाउंट्स असुरक्षित अनआॅथराज्ड पेमेंट ऐक्टिविटी, अनफैमिलियर गूगल प्ले ऐक्टिविटी, अनजान यूट्यूब ऐक्टिविटी, अनफैमिलियर ऐप जैसे बड़े खतरे हो सकते हैं।

अपने गूगल अकाउंट को सिक्यॉर करने के लिए इन टिप्स को फॉलो करें:

1. सिक्यॉरिटी चेकअप में दिए गए दिशा-निदेर्शों का पालन करें। यह गूगल की सर्विस है जिससे यूजर्स को कनेक्टेड ऐप्स, डिवाइसेज, अकाउंट परमिशंस आदि चेक कर यह पता करने में मदद मिलती है कि उनका अकाउंट सेफ है या नहीं।

2. अगर आपने अब तक अपने अकाउंट का पासवर्ड नहीं बदला है तो तुरंत पासवर्ड बदल लें।

3. उन ऐप्स और साइट्स के पासवर्ड बदल दें जहां आपने इसी गूगल अकाउंट वाला पासवर्ड इस्तेमाल किया है।

4. उन सभी ऐप्स और साइट्स के पासवर्ड बदल दें जहां आपने अपने गूगल अकाउंट ईमेल अड्रेस के साथ साइनइन किया है। इसके अलावा, जिन ऐप्स और साइट्स के लिए आपने क्रोम ब्राउजर पर पासवर्ड सेव किया है, उनके भी पासवर्ड बदल दें।

5. सनुश्चित कर लें कि आपका रिकवरी फोन नंबर और ईमेल सही है, ताकि आपके अकाउंट में कोई संदेहास्पद ऐक्टिविटी होने पर आपको सूचना दी जा सके।


युवा मन : बड़े काम के हैं शॉर्ट-टर्म कम्प्यूटर कोर्सेज

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الأربعاء، 7 سبتمبر 2022



पिछले कुछ वर्षों में युवाओं का सबसे ज्यादा रुझान आईटी सेक्टर की ओर बढ़ा है। युवाओं के बढ़ते क्रेज का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस बार भी देश में आईआईटी में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग या आईटी कोर्स को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है।

हालांकि बीटेक या एमटेक इन कम्प्यूटर साइंस हायर प्रोफेशनल डिग्री है लेकिन देश में ऐसे युवाओं की भी कमी नहीं, जो हाई स्कूल या इंटरमीडिएट के बाद कम्प्यूटर कोर्स करना चाहते हैं। ये शॉर्ट-टर्म कोर्स न सिर्फ कम्प्यूटर स्किल्स को बढ़ाते हैं, बल्कि नौकरी के रास्ते भी खोल देते हैं जिसकी वजह से आगे विद्यार्थियों को ये कोर्स काफी पसंद आ रहे हैं। कुछ विद्यार्थी किसी वजह से आगे पढ़ाई न करके कुछ काम करना चाहते हैं, तो उनके लिए कम्प्यूटर कोर्स काफी मददगार साबित हो रहे हैं।

कैसे मिलेंगी नौकरियां?

कम्प्यूटर का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है। निजी कंपनियों में कम्प्यूटर या फिर आईटी से जुड़ी नौकरियों में अपार संभावनाएं रहती ही हैं लेकिन डिजिटल इंडिया योजना शुरू होने के बाद सरकारी क्षेत्रों में भी टेक्नोलॉजी से संबंधित नौकरियों के खूब अवसर आने की संभावना है। सरकार इस योजना के लिए एक लाख करोड़ रुपए खर्च करने वाली है।

वहीं माइक्रोसॉफ्ट, टाटा, विप्रो, बिड़ला, एयरटेल, वेदांता आदि जैसी कंपनियां 4.5 लाख करोड़ रुपए निवेश करेंगी। गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरे निवेश का जोर देश के डिजिटलाइजेशन पर है। ऐसे में जो जॉब्स सृजित होंगीं, वे किसी-न-किसी रूप में कम्प्यूटर से जुड़ी होंगी।

शुरूआत में एडवांस अकाउंटिंग, डाटा एंट्री, कम्प्यूटर आॅपरेटर, सेल्स, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर, वेब डिजाइनर, प्रोग्रामर, कस्टमर सर्विस, एप्लिकेशन एनालिस्ट आदि की जॉब के लिए खूब स्कोप है। कम्प्यूटर से जुड़े तीन-चार तरह के शॉर्ट-टर्म कोर्स लोकप्रिय हैं। इनमें बेसिक कम्प्यूटर कोर्स, हाडवेयर एंड नेटवर्किंग कोर्स, सॉफ्टवेयर एंड प्रोग्रामिंग कोर्स, एडवांस आकउंयिंग और डाटा एंट्री से संबंधित कोर्स शामिल हैं। इनकी अवधि 6 महीने से 2 साल की होती है।

बेसिक कम्प्यूटर कोर्स

एक लैपटॉप या डेस्कटॉप को किस तरह से आॅपरेट करना है, इसके लिए कई सारे शॉर्ट-टर्म कोर्स चलन में हैं। इन कोर्सों के दौरान आपको कम्प्यूटर की बेसिक नॉलेज, आॅपरेटिंग सिस्टम की जानकारी, वेब प्रोग्रामिंग, इंटरनेट आॅपरेशन जैसे सर्फिंग और ईमेल यूज करना, एप्लिकेशन डेवलपमेंट, विंडोज, एमएस आॅफिस, पावर पॉइंट, वायरस प्रोटेक्शन आदि से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जाती है। थोड़े एडवांस कोर्स में वेब डिजाइनिंग भी शामिल है।

प्रमुख कोर्स

बेसिक कम्प्यूटर कोर्स, एडवांस एमएस आॅफिस, कम्प्यूटर आॅपरेटर्स एंड प्रोग्रामिंग, असिस्टेंट वेब एंड मल्टीमीडिया डिजाइन, सर्टिफिकेट इन वेब डिजाइनिंग।

हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग कोर्स

कम्प्यूटर एक मशीन है, जिसके पार्ट्स, जैसे कीबोर्ड, चिप, हार्ड डिस्क, मॉनिटर, सर्किट बोर्ड्स को हार्डवेयर कहा जाता है। इनका रख-रखाव और सुधार करने वाले एक्सपर्ट्स को हार्डवेयर इंजीनियर कहते हैं। इनका काम किसी खराबी को ठीक करना, पीसी और लैपटॉप असेंबल करना, नेटवर्क तैयार करना होता है। आॅपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल, डिस्क मैनेजमेंट रिस्क, प्रिंटर असेंबल से लेकर हर वह काम जो कम्प्यूटर में कोई भी एप्लिकेशन या सॉफ्टवेयर चलाने के लिए जरूरी है, वह काम भी हार्डवेयर इंजीनियर करता है।

प्रमुख कोर्स

डिप्लोमा इन हार्डवेयर नेटवर्किंग, डिप्लोमा इन हार्डवेयर टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर नेटवर्किंग, लैपटॉप रिपेयरिंग कोर्स।

सर्टिफिकेट इन एडवांस

अकाउंटिंग रिटेल मार्केट में बड़े स्तर पर कम्प्यूटराइजेशन हुआ है और स्टोर्स में अब सेल्स और बिलिंग कम्प्यूटर से ही होता है। ऐसे में कम्प्यूटर अकाउंटेंट्स की जरूरत काफी बढ़ गई है।

प्रमुख कोर्स

डिप्लोमा इन कम्प्यूटराइज्ड अकाउंटिंग, डिप्लोमा इन फाइनेंस एंड बैंकिंग, डाटा एंट्री एंड आॅफिस आॅटोमेशन।

सॉफ्टवेयर एंड प्रोग्रामिंग कोर्स

कम्प्यूटर से जुड़ा यह थोड़ा एडवांस कोर्स है, जिसमें लैंग्वेज कोर्स भी शामिल है। बेसिक कम्प्यूटर सीखने के बाद काम करने के लिए सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी और प्रोग्रामिंग की जरूरत होती है, जिसके लिए इन कोर्स को किया जा सकता है। इन कोर्स में सी, सी प्लस, सी प्लस प्लस, जावा स्क्रिप्ट, विजुअल बेसिक, डॉट नेट, एचटीएमएल, सीआईसी, ओरेकल, कोबोल, लिनक्स आदि के बारे में बताया जाता है।

प्रमुख कोर्स

डिप्लोमा इन नेट प्रोग्रामिंग, डिप्लोमा इन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, एडवांस डिप्लोमा इन कम्प्यूटिंग, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी।

कहां से करें कोर्स?

कम्प्यूटर के शॉर्ट-टर्म कोर्स के लिए लगभग सभी शहरों में निजी संस्थान और ट्रेनिंग सेंटर खुले हुए हैं। देश भर में आईटीआई और पॉलीटेक्निक कॉलेज भी हैं, जहां से अपनी पसंद का कोर्स किया जा सकता है।

सैलरी

कम्प्यूटर के शॉर्ट-टर्म कोर्स करने के बाद नौकरी मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। शुरूआत में 15 से 20 हजार रुपए प्रति माह तक सैलरी मिल जाती है। काम सीखने के बाद सैलरी में अच्छी वृद्धि होती है। आप खुद का पीसी रिपेयरिंग सेंटर या ट्रेनिंग सेंटर भी खोल सकते हैं। सॉफ्टवेयर एंड हार्डवेयर इंजीनियर, वेब डिजाइनर बनाकर भी अच्छे पैसे कमाए जा सकते हैं।

प्रमुख संस्थान:-

-नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली

-मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी, अहमदाबाद

-डायरेक्टोरेट आॅफ टेक्निकल एजुकेशन, कानपुर

-गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक कॉलेज, कोटा

-ए-सेट रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली

-एनआईआईटी, मुंबई 


एंड्रॉयड और आईफोन यूजर ऐसे बंद करें लोकेशन ट्रैकिंग, ये है स्टेप्स

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الاثنين، 5 سبتمبر 2022



मोबाइल लोकेशन ट्रैक कर आॅपरेटिंग सिस्टम (ओएस) प्रदाता कंपनी अपने उपयोगकर्ता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहती हैं। लेकिन तकनीक के इस युग में उपयोगकर्ता की प्राइवेसी एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। इसके लिए एंड्रॉयड और आईओएस में लोकेशन ट्रैकिंग बंद करने का खास विकल्प है, जिसे आॅफ किया जा सकता है।  एंड्रॉयड: गूगल के मोबाइल आॅपरेटिंग सिस्टम (ओएस) एंड्रॉयड पर लोकेशन बंद करने के दो विकल्प हैं। पहला ऊपर की तरफ दिए गए ट्रे बार में जाकर जीपीएस आॅफ कर दें। यह बैटरी सेविंग के साथ-साथ एप को लोकेशन देना बंद कर देता है। अगर उपयोगकर्ता चाहते हैं कि एंड्रॉयड भी लोकेशन ट्रैक न कर सके तो इसके लिए सेटिंग में एक विकल्प है। 

स्मार्टफोन की सेटिंग्स की मदद से जब गूगल के अंदर ह्यगूगल अकाउंटह्ण पर जाएंगे  तो उसमें ह्यरिव्यू योर प्राइवेसी सेटिंग्सह्ण का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक कर दें। इसके बाद ह्यगेट स्टार्टह्ण पर क्लिक कर दें। इसके बाद उपयोगकर्ता खुद देख सकते हैं  कि एंड्रॉयड कौन-कौन सी जानकारी स्टोर कर रहा है। फोन में खुद कर सकते हैं अपनी प्राइवेसी का रिव्यू. स्मार्टफोन की सेटिंग्स की मदद से जब गूगल के अंदर ह्यगूगल अकाउंटह्ण पर जाएंगे  तो उसमें ह्यरिव्यू योर प्राइवेसी सेटिंग्सह्ण का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक कर दें। इसके बाद ह्यगेट स्टार्टह्ण पर क्लिक कर दें। इसके बाद उपयोगकर्ता खुद देख सकते हैं  कि एंड्रॉयड कौन-कौन सी जानकारी स्टोर कर रहा है। 

आईफोन: एप्पल के आईओएस को सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक मजबूत आॅपरेटिंग सिस्टम माना जाता है लेकिन यूजर चाहे तो एप्पल को भी अपनी लोकेशन ट्रैक करने से रोक सकता है।  पहले अपने आईफोन की सेटिंग्स में जाएं. इसके बाद प्राइवेसी का चुनाव करें. ऐसा करने के बाद लोकेशन सर्विसेस का चुनाव करें. लोकेशन हिस्ट्री को आॅफ कर दें. एप की सूची दिख जाएगी, जो लोकेशन ट्रैक करते हैं. उन एप के लिए लोकेशन आॅफ कर दें जिनके लिए वह गैर जरूरी है. 


12वीं के बाद आप बन सकते हैं साइबर सिक्यूरिटी एक्सपर्ट्स

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बैंकिंग खातों और सरकारी निजी पोर्टल्स की सेंधमारी से आगे बढ़ते हुए हैकर्स अब सोशल मीडिया को भी निशाना बनाने लगे हैं। इजराइली कंपनी एनएसओ के स्पाईवेयर पेगासस के जरिए भारत के 1400 से ज्यादा लोगों के वाट्सएप की जासूसी का खुलासा होने के बाद यह मामला एक बार फिर गरमा गया है। आॅनलाइन ठगी करने वालों से आजकल आम आदमी और कारोबारी से लेकर सरकारें तक परेशान हैं। 

वॉट्सएप के जरिए जासूसी किए जाने की इन दिनों दुनिया भर में चर्चा है। माना जा रहा है कि स्पाईवेयर पेगासस से करीब 20 देशों के लोग जासूसी के शिकार हुए हैं। इसी तरह, अभी कुछ माह पहले ही अमेरिका में एक बड़ी डेटा सेंधमारी की घटना सामने आई। 33 वर्षीय एक महिला हैकर पेज थॉम्पसन ने अमेरिका की क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी कैपिटल वन के सर्वर को हैक करके करीब 10 करोड़ यूजर्स का डाटा चुरा लिया था। वैसे, ऐसी घटनाएं अब आम बात हैं। रोज ही अपने आसपास साइबर फ्रॉड की घटनाएं देखने-सुनने को मिल रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भी साइबर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। स्मार्टफोन और इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ने से भारत में कोई भी ऐसा दिन नहीं गुजरता, जब किसी न किसी तरीके से सैकड़ों लोगों के खातों से साइबर हमले के जरिए लाखों की रकम नहीं निकाली जाती हो। हैकर्स द्वारा आए दिन आॅनलाइन नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को देखते हुए आजकल सभी कंपनियों के आइटी विभाग में साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स की भारी जरूरत देखी जा रही है।

बढ़ रही सर्विलांस इकोनॉमी: आॅनलाइन फ्रॉड यानी इंटरनेट के जरिए होने वाला फ्रॉड। जो लोग इस तरह के फ्रॉड को अंजाम देते हैं, उन्हें हैकर्स या साइबर क्रिमिनल्स कहा जाता है। हैकर अपराधी किस्म के एक अति कुशल कंप्यूटर प्रोफेशनल होते हैं, जो अपने ट्रिक्स और तकनीकी ज्ञान के जरिए किसी दूसरे कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल यूजर के डाटा सिक्युरिटी में बिना उसकी जानकारी के सेंध लगाकर नुकसान पहुंचाते हैं, जानकारियां चोरी करते हैं या फिर कोई अन्य साइबर अपराध करते हैं।

हाल फिलहाल के वर्षों में बढ़ते साइबर अपराध की इन घटनाओं से निपटने के लिए वाइट हैट प्रोफेशनल्स यानी एथिकल हैकर्स की काफी डिमांड देखी जा रही है, जो हैकिंग और इसके खतरों को अच्छी तरह समझते हैं। ये लोग हैकिंग के सारे दांवपेच जानने के कारण साइबर के खतरों का मुकाबला करने में काफी कुशल होते हैं। इसके अलावा, हैकिंग के अंदेशों को भांपते हुए सर्वर की सिक्युरिटी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर होती है। इस फील्ड में संभावनाएं बहुत हैं, क्योंकि भारत सहित दुनियाभर में सर्विलांस इकोनॉमी बढ़ रही है।

कंपनियों के अलावा हर सरकार साइबर डिफेंस को गंभीरता से ले रही है, अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है। साइबर क्षेत्र के स्टार्टअप्स में निवेश किया जा रहा है। सीईआरटी-इन नाम से इसके लिए देश में बकायदा एक सरकारी एजेंसी भी है, जो साइबर सिक्युरिटी के लिए काम करती है। इसके अलावा, गृह मंत्रालय के अपने फोरेंसिक लैब्स हैं। साथ ही, फेस रिकग्निशन से लेकर स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर्स की इन दिनों काफी डिमांड है। जाहिर है इस फील्ड में प्राइवेट सेक्टर के साथ-साथ सरकारी सेक्टर में भी कुशल साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स के लिए काफी मौके हैं।

कोर्स एवं योग्यता: एथिकल हैकिंग या साइबर सिक्युरिटी का कोर्स आप 12वीं के बाद कर सकते हैं। देश के कई संस्थानों में यह कोर्स संचालित हो रहे हैं। ये कोर्स छह माह से लेकर एक साल की अवधि के हैं। इसी फील्ड में एडवांस कोर्स भी कर सकते हैं।

जॉब्स के अवसर: साइबर सिक्युरिटी प्रोफेशनल्स की इन दिनों सबसे ज्यादा मांग आइटी कंपनियों और आइटी विभागों में है। खास तौर से आइटी सिक्युरिटी सर्टिफिकेशन सेवा देने वाली कंपनियों और आइटी फर्म्स में ऐसे प्रोफेशनल्स की काफी डिमांड देखी जा रही है। इसके अलावा, बैंक, टेलीकॉम कंपनीज, जांच एजेंसीज सहित विभिन्न प्रतिष्ठानों में भी आजकल साइबर एक्सपर्ट की सेवाएं ली जा रही हैं। पेटीएम, भीम जैसी डिजिटल पेमेंट तकनीक को सुरक्षित करने के लिए भी इन्हीं प्रोफेशनल्स की मदद ली जा रही है। इस फील्ड में अपना स्टार्टअप या कंसल्टेंसी सर्विस शुरू करके भी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है।

खुद को पहचानें: साइबर एक्सपर्ट बनने के लिए कंप्यूटर का समुचित नॉलेज होना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके लिए कंप्यूटर के कंपोनेंट्स से लेकर इसके कॉन्फिगरेशन और वर्किंग मेथड के बारे में जानना जरूरी होता है, क्योंकि कंप्यूटर के बेसिक्स के बारे में अच्छी समझ से ही आप एक अच्छे एथिकल हैकर बन सकते हैं।  लाखों में कमाई: साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट लाखों में कमाई करते हैं। इन्हें शुरूआत में ही 30 से 40 हजार रुपये तक की सैलरी आसानी से मिलती है, जो अनुभव व विशेषज्ञता के आधार पर लाखों तक हो सकती है।




हॉस्पिटल मैनेजमेंट: डॉक्टर बने बगैर मेडिकल फील्ड में यूं बनाएं करियर

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السبت، 3 سبتمبر 2022



अगर आपने मेडिकल की पढ़ाई नहीं की है और फिर भी मेडिकल फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं तो आपके लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट एक शानदार कोर्स है। हेल्थ सेक्टर में यह काफी आकर्षक और बेहतर कोर्स है। आइए आज जानते हैं कि इस फील्ड में क्या करना होता है, कैसे बना सकते हैं करियर, शैक्षिक योग्यता क्या चाहिए आदि...

करना क्या होता है?

किसी हॉस्पिटल में मरीजों को चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने के अलावा भी बहुत सा काम होता है। इनमें से कुछ काम आर्थिक और प्रबंधन संबंधित गतिविधियों से जुड़ा होता है। हॉस्पिटल के मेडिकल स्टाफ के जिम्मे तो मरीजों के उपचार और देखभाल से संबंधित जिम्मेदारी होती है। हॉस्पिटल के प्रबंधन और अन्य कामों को देखने के अन्य स्टाफ की जरूरत होती है जिनको आप हॉस्पिटल मैनेजर कह सकते हैं। इस फील्ड में मेडिकल और गैर मेडिकल दोनों बैकग्राउंड वाले कैंडिडेट्स अपना करियर बना सकते हैं।

कोर्स की डीटेल

इस फील्ड में आप 12वीं के बाद यानी बैचलर लेवल पर कोर्स कर सकते हैं। बैचलर लेवल पर तीन सालों का बैचलर आॅफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट/ऐडमिनिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके लिए 12वीं क्लास कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ पास होना जरूरी है।

डॉक्टोरल डिग्री

हॉस्पिटल मैनेजमेंट में एमडी/एमफिल कर सकते हैं। डॉक्टोरल डिग्री के लिए मास्टर आॅफ हॉस्पिटल ऐडमिनिस्ट्रेशन डिग्री चाहिए।

टॉप कॉलेज

आॅल इंडिया इंस्टिट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली

आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे 

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय 

सिंबायॉसिस सेंटर आॅफ हेल्थ केयर 

फैकल्टी आॅफ मैनेजमेंट स्टडीज (एफएमएस), दिल्ली यूनिवर्सिटी 

बिड़ला इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नॉलजी ऐंड साइंस, पिलानी 

कहां मिलती है नौकरी?

अगर आपके पास हॉस्पिटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा या डिग्री है तो आप को नर्सिंग होम, क्लिनिक, पब्लिक या प्राइवेट सेक्टर के हॉस्पिटल, हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों, मेडिकल इंस्टिट्यूट्स, पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट्स, फामार्सूटिकल्स और हॉस्पिटल सप्लाई फर्म आदि में नौकरी मिल सकती है।

वेतन

हॉस्पिटल मैनेजर/ऐडमिनिस्ट्रेटर की सैलरी संगठन के ऊपर निर्भर करती है। हॉस्पिटल ऐडमिनिस्ट्रेटर की औसत सैलरी 3 लाख रुपये से 4 लाख रुपये सालाना तक होती है। ज्यादा अनुभव होने पर 5 लाख रुपये से 6 लाख रुपये सालाना तक सैलरी मिल सकती है।

ट्विन टावर के जमींदोज होने का काउंटडाउन शुरू, विशेषज्ञ बोले- कोई और तकनीक अपनाने पर लग जाते दो साल

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السبت، 27 أغسطس 2022



नोएडा। सुपरटेक के अवैध ट्विन टावर को सुरक्षित तरीके से गिराने के लिए दो ही विकल्प थे, पहला विस्फोटक से कुछ सेंकेट में गिरा दिया जाए या फिर तोड़ा जाए जिसमें डेढ़ से दो साल का समय लगता। यह बात विशेषज्ञों ने कही। यह इमारत करीब 100 मीटर ऊंची है जो कुतुब मीनार से भी ऊंची है। इमारत को गिराने का काम कर रहे एडफिस इंजीनियरिंग के अधिकारी ने बताया कि इसे 28 अगस्त को ‘‘वाटर फॉल इम्प्लोजन’ तकनीक से सुरक्षित तरीके से गिराया जाएगा। उन्होंने बताया कि एपेक्स टावर (32 मंजिला)और सियान (29 मंजिला) 15 सेंकेड से भी कम समय में ताश के पत्ते की तरह गिरा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि साथ ही सुनिश्चित किया जाएगा कि आसपास की इमारतों को नुकसान नहीं पहुंचे, जिसमें से एक इमारत महज नौ मीटर की दूरी पर स्थित है।

गडकरी का डिमोशन और फडणवीस का प्रमोशन, RSS में बदले समीकरण से कटा पत्ता, क्या है बीजेपी की फ्यूचर प्लानिंग?

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ये वाजपेयी और आडवाणी के दौर की बात है। तब चाणक्य की भूमिका में प्रमोद महाजन हुआ करते थे। एक बार प्रमोद महाजन से वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी ने पूछा था कि आप वाजपेयी और आडवाणी में से बड़ा नेता किसे मानते हैं। प्रमोद महाजन ने जवाब दिया था कि बड़ा नेता वो जिसे संघ बड़ा नेता माने। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ये वो हीरे हैं जो संघ की खुदाई से निकले हैं। लेकिन क्या हुआ ऐसा कि कभी मोहन भागवत के संघ संरचालक बनने के बाद बीजेपी की कमान शाखा में अपना बचपन बीताने वाले नेता को सौंपे जाने के 13 बरस के भीतर ही उसी संघ की हरी झंडी के बाद नागपुर से बीजेपी सांसद गडकरी को पार्टी संसदीय बोर्ड से हटा दिया गया। इसके अलावा केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) से भी हटा दिया गया। 

रूस यूक्रेन जंग के क्‍या होंगे परिणाम और कितने दिनों तक चलेगा युद्ध

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الأربعاء، 24 أغسطس 2022

 

यूक्रेन और रूस के बीच भीषण जंग जारी है। कीव से खारकीव तक तबाही मची है। रूस ने हमले में कमी लाने का वादा किया था लेकिन मिसाइल और रॉकेट हमले में कोई कमी नहीं है। बूचा शहर में 300 से अधिक आम नागरिकों के शव बरामद हुए हैं। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण से संबंधित मुद्दों पर रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अपने ‘वीटो’ का इस्तेमाल करना आगे भी जारी रखेगा।


ठाकुर राजा सिंह: फेसबुक ने दिया था डेंजरस मैन का टैग

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उत्तर प्रदेश का काशी जो संत कबीरदास जी का गांव है। उनका एक सूक्ति वाक्य है- ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये। औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए। लेकिन इससे 12 सौ किलोमीटर की दूरी पर बसे तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में बैठे नेता अगर कबीरदास जी की वाणी को आत्मसात कर लेते तो आज तो नहीं गिरफ्तारी झेलना पड़ता, न ही पार्टी से निष्कासन। वो नाम है तेलंगाना भाजपा विधायक ठाकुर राजा सिंह लोध का। जिन्हें सितंबर 2020 में फेसबुक ने डेंजरस मैन का टैग दिया था। कभी वो अपने रोहिंग्याओं को गोली मारने वाले बयान की वजह से चर्चा में रहे तो कभी राम मंदिर के लिए जान लेने की बात कहकर सुर्खियों में रहे। लेकिन पैगंबर को लेकर दिए उनके ताजा विवाद ने माहौल को गर्म कर दिया है।विधायक के बयान पर हंगामा बढ़ गया। प्रदर्शनकारी सड़क पर उतर आए और सिर तन से जुदा के नारे लगाए गए।

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