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विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से लिया संन्यास — 14 साल के सुनहरे सफर का अंत

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الخميس، 15 مايو 2025

भारत के दिग्गज बल्लेबाज और सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में से एक विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का एलान कर दिया है। इस खबर ने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को भावुक कर दिया है।


कोहली ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में लिखा

"टेस्ट क्रिकेट हमेशा मेरे दिल के सबसे करीब रहा है। भारत के लिए सफेद जर्सी पहनकर खेलना मेरे लिए गर्व की बात थी। अब समय आ गया है कि मैं टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहूं और युवाओं को आगे आने दूं।"

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विराट कोहली का टेस्ट करियर (2011-2025):


आंकड़े प्रदर्शन


कुल टेस्ट मैच - 123

कुल रन - 9,230

शतक - 30

अर्धशतक - 31

सबसे बड़ा स्कोर 254* नाबाद

कप्तान के रूप में जीत 68 मैचों में 40 जीत



कोहली ने 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ डेब्यू किया था। उनकी अगुवाई में भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास का स्वर्णिम पल था। उन्होंने भारत को नंबर 1 टेस्ट टीम भी बनाया।

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रिटायरमेंट के कारण:


1. शारीरिक थकान और उम्र का असर — लंबे समय से खेलते हुए शरीर पर दबाव बढ़ा है।

2. निजी जीवन को प्राथमिकता — परिवार और खुद के लिए समय निकालना चाहते हैं।

3. नए खिलाड़ियों के लिए जगह बनाना — कोहली मानते हैं कि अब युवा खिलाड़ियों को आगे लाना जरूरी है।

4. सम्मानजनक विदाई लेना चाहते थे — उन्होंने अपने करियर को संतुष्टि के साथ खत्म करने का फैसला लिया।

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क्या विराट बाकी क्रिकेट खेलेंगे?


विराट ने अभी सिर्फ टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट लिया है।

वे अभी भी वनडे और टी-20 फॉर्मेट में खेलना जारी रखेंगे।

2025 में होने वाली ICC चैंपियंस ट्रॉफी में उनके खेलने की पूरी संभावना है।

इसके अलावा वे IPL में भी खेलते रहेंगे।

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रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे विराट?


कोहली अब अपने फिटनेस ब्रांड और वेलनेस प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर सकते हैं।

वे आने वाले समय में मेंटोर, कोच या क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन में भी भूमिका निभा सकते हैं।

हाल ही में वे धार्मिक यात्रा पर वृंदावन भी गए थे, जिससे ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे अपने आध्यात्मिक जीवन को भी समय देना चाहते हैं।

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एक युग का अंत


विराट कोहली सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा रहे हैं। उनकी आक्रामकता, फिटनेस, मेहनत और कप्तानी में जोश ने भारतीय क्रिकेट को एक नई पहचान दी। कोहली का टेस्ट करियर खत्म हुआ है, लेकिन उनके योगदान को क्रिकेट प्रेमी कभी नहीं भूल पाएंगे।



कैसे गलत हो गए राहुल', तारिक कर्रा ने इस्तीफे की टाइमिंग पर उठाया सवाल, बोले- आजाद के माध्यम से भाजपा ने J&K में कांग्रेस को तोड़ा

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السبت، 27 أغسطس 2022

 


नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता तारिक कर्रा ने शनिवार को पार्टी छोड़ने वाले गुलाम नबी आजाद पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गुलाम नबी आजाद के माध्यम से कांग्रेस को तोड़ने में सफल रही। उन्होंने कहा कि गुलाम नबी आजाद सूबे में बहुत पहले से पार्टी से इतर काम कर रहे थे और अपने इस्तीफे का समय उन्होंने खुद तय किया था। दरअसल, गुलाम नबी आजाद ने राहुल गांधी पर सवाल खड़े करते हुए शुक्रवार को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

धार्मिक भावनाएं आहत और शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने का मामला पहुंचा कोर्ट

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ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में वाराणसी की जिला अदालत में हिन्दू पक्ष की दलीलें बृहस्पतिवार को पूरी हो गयीं। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तारीख नियत की है। हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता शिवम गौड़ ने बताया कि वादी राखी सिंह की तरफ से दलीलें पूरी हो गयी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से सरकारी अधिवक्ता महेन्द्रनाथ पांडेय ने भी दलीलें रख दी हैं। उन्होंने बताया कि अब अगली सुनवाई की तारीख पर मुस्लिम पक्ष अपना प्रतिवाद रखेगा। इस मामले में अब दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रख चुके हैं।

धार्मिक भावनाएं आहत और शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने का मामला पहुंचा कोर्ट

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الأربعاء، 24 أغسطس 2022



 ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में वाराणसी की जिला अदालत में हिन्दू पक्ष की दलीलें बृहस्पतिवार को पूरी हो गयीं। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तारीख नियत की है। हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता शिवम गौड़ ने बताया कि वादी राखी सिंह की तरफ से दलीलें पूरी हो गयी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से सरकारी अधिवक्ता महेन्द्रनाथ पांडेय ने भी दलीलें रख दी हैं। उन्होंने बताया कि अब अगली सुनवाई की तारीख पर मुस्लिम पक्ष अपना प्रतिवाद रखेगा। इस मामले में अब दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रख चुके हैं।

कैबिनेट में बोरिस जॉनसन को कोई नहीं चाहता

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ब्रिटेन में सियासी घमासान के बाद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि बोरिस जॉनसन की कुर्सी पर कई बार खतरा मंडराया लेकिन इस बार वह अपनी सत्ता को चाह कर भी नहीं बचा पाए। हाल इतना बुरा है कि अब किसी भी दावेदार ने बोरिस जॉनसन को अपने मंत्रिमंडल में शामिल करने का वादा नहीं किया है। टोरी लीडरशीप के अंदर टॉम तुगेंदहट, पेनी मोर्डौंट, ऋषि सुनक, लिज़ ट्रस और केमी बडेनोच से दो बार सवाल के जवाब में हाथ उठाने का अनुरोध किया गया था। जिसमें पूछा गया कि क्या बोरिस जॉनसन को सेवा जारी रखने की अनुमति देने के इच्छुक होंगे या नहीं। हालाँकि उनके पास हाथ उठाने के बहुत अवसर थे, लेकिन उनमें से किसी ने भी ऐसा नहीं किया। इससे पता चलता है कि कोई भी बोरिस जॉनसन को अपने कैबिनेट में शामिल नहीं करना चाहता है।

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