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अफसरों के सख्त कान के पर्दे नहीं भेद पा रही मरीजों की चीत्कार

الجمعة، 16 سبتمبر 2022

/ by Today Warta



डॉक्टर से लेकर वार्ड ब्वॉय व सफाई कर्मियों तक के चल रहें नर्सिगहोम

गरीब निर्धन मरीजों को जिला अस्पताल में भी मुफ्त नहीं मिल पा रहा इलाज

कौशाम्बी। अव्यवस्थाओं से जूझ रहें जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की चीत्कार अफसरों के सख्त काने के परदों को नहीं भेद पा रही है। इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक में मरीजों के इलाज में जमकर हिला हवाली की जाती है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात दो दर्जन चिकित्सक निजी नर्सिगहोमो में सेवा दे रहें है। कई चिकित्सक खुद ही हॉस्पिटल चला रहे है। ऐसे में जिला अस्पताल में जुकाम बुखार के अलावा मुफ्त का इलाज सिर्फ कोरी कल्पना साबित हो रहा है। गरीबो व मजलूमों को मुफ्त में आसानी से इलाज मुहैया कराने की योजना में संयुक्त जिला चिकित्सालय मंझनपुर फेल होता दिख रहा है। अफसरों की अनदेखी से जिला अस्पताल में मरीजों का जमकर शोषण हो रहा है। रसूखदार मरीजों को तो किसी तरह अस्पताल में चिकित्सकीय सुविधा मुहैया हो जाती है। लेकिन गरीब और निर्धन मरीजों को जिला संयुक्त चिकित्सालय से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। अस्पताल में तैनात दर्जन भर चिकित्सक निजी नर्सिगहोमो में सेवा दे रहें है।  इसके अलावा सबसे हैरानी की बात है कि जिला अस्पताल के वार्ड ब्वाय व सफाई कर्मी भी खुद का नर्सिगहोम खोलकर मरीजों का इलाज कर रहें है। ऐसे में जिला अस्पताल केवल रेफर सेंटर ही बनकर रह गया है। आरोप है कि जो जिला अस्पताल में भी जुकाम व बुखार के अलावा आॅपरेशन से लेकर मेडिकल तक का रेट फिक्स है। हर आॅपरेशन का अलग अलग रेट लिस्ट बनी हुई है। बिना रकम मुहैया कराए आॅपरेशन नहीं होता है। साथ ही मेडिकल में भी गंभीर धारा बनवाने के लिए अलग अलग रेट तय है। चर्चा है कि दर्जन भर एजेंसी कर्मी डॉक्टरों से मिलकर सारा दिन उसूली में लगे रहते है। आरोप है कि उसूली का सारा कार्य जिला अस्पताल के अफसरों की मौन स्वीकृति से हो रहा है। जिलाधिकारी सुजीत कुमार का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्था की जांच कराकर कार्रवाई का जाएगी। 


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