राकेश केसरी
घुट रहा मन, पिस रहा बचपन,सिसकियो में बीतती हैं रात
कौशाम्बी। घरेलू काम, सड़क ढाबों, होटलों सहित विभिन्न उद्योग धन्धों आदि में बाल मजदूरी पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। इसके लिए कानून बना कर अधिनियमों व उपबंधो का उल्लंघन कर किसी बच्चे से काम लेने पर जुमार्ना व सजा का प्राविधान तथा पुनर्वास तक की योजना निर्धारित की। लेकिन गरीबी की पृष्ठभूमि स्वयं व परिवार का पेट पालने के लिए बाल मजदूर घुटते मन से बचपन को पिसने में लगा हुआ है। सहन व सब कुछ ताक पर रखकर जोखिम भरे काम मजदूरी पर करने को तैयार है। नन्हें हाथों में पुस्तक कलम की जगह बेलचा,कुदाल,रिक्शा.ठेला हैण्डिल आदि देखने को मिल रहा है। मालूम हो कि बालश्रम निरोधक उपबंध के अन्तर्गत कम उम्र बालकों के लिए अलग से कानून बनाकर बालकों के क्रय.विक्रय एवं उनके द्वारा गैर कानूनी व अनैतिक कार्य करने पर प्रतिबंध लगाकर बालश्रम को विकट सामाजिक बुराई व अभिशाप मानकर बालकों द्वारा किये गये वह सभी कार्य जिससे सीधे तौर पर स्वयं या परिवार जनों के लिए मात्र आर्थिक लाभ के लिए पहुंचाने के उद्देश्य मात्र से ही किया जाय और उससे शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास में बाधा पहुंचे अनैतिक करार दिया गया है। इसके अन्तर्गत विभिन्न उद्योग धंधे,कालीन बुनाई, हथकरघा, चमड़ा, कांच, भवन निर्माण,पत्थर तोडना, होटल, ढाबा, फैक्ट्री,दुकान,वर्कशाप,सेल्स मैन,कचरा चुनना,खेती.बाड़ी,नौकर आदि के काम पर भारी संख्या मे बालकों द्वारा कार्य लिया जा रहा है और इन स्थानों पर बाल मजदूरो के रुप में कार्यरत बालक.बालिकाओं का बड़े पैमाने पर शोषण मालिकों,एजेन्टो,सहकर्मियों,अपराधिक प्रवृति वाले लोगों द्वारा किया जा रहा है,और उठने वाली हर आवाज को दबा दिया जाता है। बालश्रमिक मन मायूस कर पेट की भूख शांत करने व परिवार का भरण.पोषण करने के लिए सब कुछ सहते रहते है। श्रम मंत्रालय द्वारा किये गये सारे प्रयास जिले तक तो आते हैं लेकिन बालश्रम पर रोक महज औपचारिकता की पूर्ति तक ही सीमित होकर रह जाते हैं। जानकारी के अनुसार जिले में आठ से पंद्रह वर्ष की आयु के बीच करीब तीन सौ बच्चे विभिन्न ढाबों,होटलों,मोटर गैरेज व अन्य प्रतिष्ठानों में प्रतिदिन दस से बारह घंटे तक डयूटी करने को विवश है। जिला मुख्यालय समेत विभिन्न स्थानों पर मासूम रिक्शा,ठेला,जूठे बर्तन धोने सहित कठिन कार्य कर रहे है। जिलाधिकारी का कहना है कि बालश्रम रोकने के लिए प्रशासन स्तर से हर संभव प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया है। किसी भी हाल में बाल श्रमिकों का शोषण नहीं होने दिया जायेगा।

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