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अंधता के लिए जिम्मेदार समस्याओं का उपचार संभव

الخميس، 13 أكتوبر 2022

/ by Today Warta



इन्द्रपाल सिंह प्रिइन्द्र

विश्व दृष्टि दिवस पर हुए विविध कार्यक्रम

ललितपुर। राष्ट्रीय अंधत्व व अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला चिकित्सालय सहित स्वास्थ्य केन्द्रों पर अक्टूबर माह के द्वितीय गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया गया। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेत्र परीक्षण आयोजित हुए। वहीं भगवान महावीर नेत्र चिकित्सालय में संगोष्ठी हुई। सीएमओ डा.जे.एस.बक्शी ने बताया कि इस वर्ष लव योर आई यानि अपनी आंखों से प्यार थीम पर विश्व दृष्टि दिवस मनाया गया। इसका उद्देश्य जन सामान्य को दृष्टि की सुरक्षा, दृष्टिहीनता के कारण व उसके बचाव की जानकारी देना है। देश में दृष्टिहीनता के विभिन्न कारण हैं, इनमें 66 प्रतिशत मोतियाबिंद, 8 प्रतिशतकोर्निया में सफेदपन, 7 प्रतिशत मोतियाबिंद ऑपरेशन फेल होने के कारण, 6 प्रतिशत आंखों के पिछले हिस्से की बीमारी, 5.5 प्रतिशत कालापानी की समस्या है। इनमें 93 प्रतिशत समस्या सही समय पर उपचार होने से ठीक भी हो सकती हैं। बस, जरूरत है मरीज को योग्य नेत्र विशेषज्ञ के पास पहुंचने की। कम्यूनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ डा.सौरभ सक्सेना ने बताया कि प्रत्येक छह माह में अपनी आंखों की जांच नेत्र विशेषज्ञ से अवश्य कराना चाहिए। प्रति दिन सुबह उठकर व रात को सोते समय आंख व आंख के चारो ओर की त्वचा को साफ पानी से धोएं। आंखों और चेहरे को साफ करने के लिए साफ और अपना अलग तौलिया इस्तेमाल करें। धूप और बहुत तेज रोशनी से आंखों को बचाए। अच्छें किस्म के चश्में का उपयोग करें। वर्तमान में त्योहार का सीजन है, इसलिए आंखों को दुर्घटना से बचायें जैसे आतिशबाजी छोड़ते समय और पटाखा फोड़ते समय सावधानी बरतें। आंखों में यदि कुछ गिर जाये तो आंख को मलिये नहीं, बल्कि साफ पानी से आंख को धोकर बाहरी कण को बाहर निकाल दें। पुस्तक को पर्याप्त प्रकाश मेंआंखों से एक से डेढ़ फीट की दूरी पर रखकर पढ़ें। चलती बस में या लेटे हुए या बहुत कम प्रकाश में कभी भी न पढ़ें। इससे आंखो पर जोर पड़ता है। आंखो का इलाज स्वयं न करे तथा तुरंत इलाज व सलाह के लिए निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाएं। छात्रों में दृष्टिहीनता मुख्य रूप से दृष्टिदोष के कारण होती है।

यह रखें ध्यान

आंखें को स्वस्थ्य रखने के लिए प्रतिदिन हरी घास पर नंगे पांव चलें। 40 वर्ष एवं अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों को वर्ष में एक बार नेत्र परीक्षण कराना चाहिए। 40 वर्ष के बाद नजदीक से पढऩे-लिखने के लिए चश्में की आवश्यकता होती है, साथ ही ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर की जांच कराना चाहिए। मोतियाबिंद से पीडि़त व्यक्ति को सही समय पर आपरेशन कराने से ठीक किया जा सकता है। इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारी हेमंत कुमार, श्रीदिगंबर जैन महावीर ने चिकित्सालय के अध्यक्ष अरविंद जैन, महामंत्री देवेंद्र जैन, डा.राजदीप जैन, भूपेंद्र आदि उपस्थित रहे।

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