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मीट के नाम पर जहर परोस रहें हैं व्यापारी

الأربعاء، 19 أكتوبر 2022

/ by Today Warta



राकेश केशरी

शासन के दिशा निदेर्शों का संबधित विभाग नही कर रहें पालन

कौशाम्बी। जनपद में मीट खानें वालों की संख्या में दिनों-दिन बढ़ोत्तरी हो रही हैं। लेकिन मीट खानें वालें लोगो को शायद इस बात का आभास नही हैं। वह जिस बकरी,बकरा,भेड़,भैसा,मुर्गा आदि के मीट का इस्तेंमाल कर रहें हैं। उसका चिकित्सीय परीक्षण हुआ हैं कि नही। जबकि शासन नें इसके लिए निर्देश जारी कर रखा हैं कि बिना चिकित्सीय परीक्षण के शाप व बाजार में मीट बेचनें पर प्रतिबंध हैं। गौरतलब हों कि जिले में पशुओं को बगैर चिकित्सकीय परीक्षण के काटा जा रहा है। मांस बेचने वाले अधिक मुनाफा कमाने के लिए बीमार जानवरों को सस्ते दाम में खरीद कर उसका मास बाजार में बेच रहे हैं। जिससे बीमारी फैलने का डर है। शासन ने पशुचिकित्सा विभाग और श्रम विभाग, पंचायती राज विभाग से अलग-अलग सर्वे कर रिपोर्ट मागी है। मांस के लिए काटे जाने वाले बकरा और बकरियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराना आवश्यक है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि जिस पशु को काटकर उसका मांस बाजार में बेचा जाना है, वह किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित तो नहीं है, जिसका मांस खाने से कोई बीमारी फैलने का अंदेशा तो नहीं है। लेकिन जिलें के विभिन्न बाजारों में यह जाने बिना ही पशु का वध कर उसका मांस बाजार में बेचा जा रहा है। वही दूसरी ओर गली मुहल्लों में जानवर काटने के बाद उनके शरीर से निकलने वाला खून और कचरा नालियों में बहाया जाता है। उससे पर्यावरण पर क्या असर पड़ रहा है। यह जानने की जिम्मेदारी पर्यावरण विभाग को सौंपी गई। पर्यावरण विभाग को अवैध तरीके से हो रहे पशु वध वाले स्थान एवं मास की बिक्री वाले स्थानों के आसपास पर्यावरण से संबधित रिपोर्ट तैयार करनें का शासन नें निर्देश दिया हैं। लेकिन जिलें में शासन के द्वारा दियें गयें निदेर्शों का जहां एक ओर संबधित विभाग पालन करतें नही दिखाई दें रहें हैं। वही दूसरी ओर बिना परीक्षण के मांस व्यापारी लोगो को मीट के नाम पर जहर खिला रहें हैं। जिसे पर रोक लगाया जाना नितांत आवाश्यक हैं। 


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