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हजार साल पहले की शिल्प कला का बिखरा है खजाना

الثلاثاء، 15 نوفمبر 2022

/ by Today Warta



संस्कृति की इस विरासत को किसी ने न समझा न जाना 

कटनी। जिले के बिलहरी , तिगवाँ  ( बहोरीबंद  ) , कारीतलाई , बड़गाँव में कल्चुरि शासन काल के दौरान निर्मित कराये गए भव्य मन्दिरों के कलात्मक भग्नावशेष  एवं उनमें स्थापित कराई गई पाषाण प्रतिमाओं के प्रचुर भंडार पुरातत्व विभाग के आधीन या तो कचरे की तरह पड़े हैं या तालों में कैद हैं । पत्थरों में उत्कीर्ण यह कलात्मक विरासत जहां जिस स्थान पर कचरे की तरह उपेक्षित पड़ी है उसी स्थल पर व्यवस्थित जमा कर रख दी जाये और इसके अगल बगल गार्डनिंग कर दी जाये तो ये भग्न पाषाण कलाकृतियाँ निखर उठेंगी तथा ये स्थल एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रुप में उभर सकते हैं । इन्टैक कटनी चेप्टर के आमंत्रण पर जबलपुर से आए वरिष्ठ इतिहासकार, साहित्यकार , पत्रकार एवं इन्टैक जबलपुर के सीनियर मेम्बर श्री राजेन्द्र चंद्रकांत राय , वरिष्ठ पत्रकार एवं शहरनामा जबलपुर के लेखक श्री दिनेश चौधरी , वरिष्ठ साहित्यकार एवं कांग्रेस नेता श्री रुपेन्द्र पटेल , बांधवगढ़ के वरिष्ठ फोटोग्राफर श्री सतेन्द्र तिवारी  तथा इन्टैक कटनी चेप्टर के कन्वीनर श्री मोहन नागवानी के साथ दो दिन से यानि कल और आज इन स्थलों का दौरा कर इस विरासत के उन्नयन की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया गया । इस दिशा में नगर के प्रबुद्ध वर्ग , जनप्रतिनिधि एवं मीडिया जगत को भी अपने स्तर पर एक सजग पहल करना चाहिये ।

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