राकेश केसरी
कौशाम्बी। जिले में बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है,लेकिन संबंधित विभाग अभी भी मौन है। मौसम में आए बदलाव से बीमारियां बढ़ रही है। लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन इसको लेकर सर्तक नहीं है। मरीजों को घंटों इधर.उधर भटकना पढ़ता है। डॉक्टर से लेकर निचला स्टॉफ भी अपने कार्य के प्रति उदासीन है। इसी प्रकार कुपोषण को लेकर शासन ने तो सख्ती दिखाई। हर जिला अस्पताल में पोषण पुर्नवास केंद्र बनाए गए। लेकिन कई जनपदों में इस पर कुछ हद तक अंकुश लग पाया है। लेकिन जनपद कौशाम्बी में भारी संख्या में बच्चे अभी भी इससे पीडित हैं। जिला अस्पताल में बने पोषण पुर्नवास केंद्र में लगातार कुपोषण से ग्रस्त बच्चे पहुंच रहे हैं। बीते माह से अब तक सीएचसी व पीएचसी से तीस बच्चे जिला अस्पताल पहुंच चुके हैं। चिकित्सक डा0 केशरवानी ने बताया कि गांव से रेफर हुए बच्चे यहां आते हैं,हमारी प्राथमिकता रहती है,उन्हे अच्छी डाइट देकर उनकी हालत में सुधार करें,ऐसा होता भी है,कई ऐसे बच्चे आए जन्म के बाद उनका वजन काभी कम था, हमने उन्हें टोन्ड दूध व अल्प आहार नियमित रुप से दिया और उनके वजन में इजाफा हुआ। कई बार बच्चों के परिजन ही उनकी हालत के प्रति सजग नहीं होते। हम उन्हें जो डाइट चार्ट देते हैं वह इसका पालन नहीं करते हैं। जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है।
सुधार की है जरुरत
सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार जिला अस्पताल में देने का निर्देश दिया। ऐसा इसलिए किया गया था,कि आर्थिक रुप से कमजोर परिवार की गर्भवती महिलाओं को अच्छी डाइट मिल सके,जिससे बच्चे के शरीर स्वस्थ हो। लेकिन जिला अस्पताल में यह सुविधा ही नदारद है। जिले में हुए सर्वे में सह निकल कर आया कि लगभ दस हजार से अधिक बच्चे कुपोषण से ग्रस्त पाए गए थे। इतनी बड़ी संख्या होने के बाद भी एक पुर्नवास केंद्र में बच्चों का इलाज कैसे संभव है। दस बेड पर बीस बच्चों को नहीं रखा जा सकता है। सरकार व अस्पताल प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरुरत है।

Today Warta