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मानव अधिकार आयोग ने चार मामलों में लिया संज्ञान

الجمعة، 25 نوفمبر 2022

/ by Today Warta



दिलीप सिंह सेंगर

भोपाल। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने चार मामलों में संज्ञान लिया है। आयोग के माननीय सदस्य श्री मनोहर ममतानी ने संज्ञान लेकर संबंधित विभागाधिकारियों से समय-सीमा में जवाब मांगा है। पहला मामला उज्जैन जिले का है। यहां की घट्टिया तहसील के ग्राम रलायता में बीते बुधवार को देर शाम बिजली का जर्जर पोल गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई है। हादसा बिजली विभाग की लापरवाही के चलते हुआ है। घटना के बाद बीते गुरूवार को बच्चें का पीएम होने के बाद ग्रामीणों और एक सामाजिक संगठन ने रलायता-घट्टिया मार्ग पर बच्चों के शव रखकर भारी चक्काजाम कर दिया। मामले में आयोग ने मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी), पश्चिम क्षेत्र विविकं.लि., इंदौर से प्रकरण की जांच कराकर एक माह में जवाब मांगा है। आयोग ने यह भी कहा है कि मृतकों को परिजनों को देय मुआवजा राशि प्राप्त कर ली गई है या नहीं, इस बारे में भी प्रतिवेदन दें।

दूसरा मामला भिण्ड जिले का है। यहां पिता की मौत के बाद डाकघर की एफडी और किसान विकास पत्र का डेथ क्लेम कराने के लिए एक नेत्रहीन बेटा पिछले छह महीने से भटक रहा है। उसका आरोप है कि डाकघर के एक एजेंट ने एफडी और किसान विकास पत्र का डेथ क्लेम दिलाने के एवज में उससे 25 हजार रुपए और सारे कागज ले लिए। लेकिन काफी दिनों तक क्लेम का पैसा नहीं मिला, तो उसने गुस्सा कर पैसा वापस कर दिए। साथ ही अब धमकी बदले दे रहा है कि भिण्ड तो क्या, पूरे प्रदेश में किसी को भी यह काम नहीं करने दूंगा। नेत्रहीन व्यक्ति ने इस संबंध में पुलिस से शिकायत की है। वहीं पोस्ट मास्टर का कहना है कि दिव्यांग उनके पास आए, तो वह हर संभव मदद करेंगे। मामले में आयोग ने कलेक्टर, भिण्ड से प्रकरण की जांच कराकर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

तीसरा मामला मुरैना जिले का है। यहां बीते गुरुवार को एक स्कूल में पानी की टंकी का चबूतरा गिरने से एक छात्र की मौत हो गई, जबकि दो छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद कलेक्टर ने संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्जकर उसकी गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिला शिक्षाधिकारी और महिला बाल विकास अधिकारी से सभी स्कूलों में बनी टंकियों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट मांगी है। घटना भोगीपुरा माध्यमिक शाला में हुई, जहां दूसरी कक्षा का छात्र अभिषेक यादव पुत्र पवन यादव अपने भाई गौरव और एक दोस्त के साथ स्कूल में बनाए गए पानी की टंकी के चबूतरे पर पानी पीने के लिए गया था। इसी दौरान चबूतरा गिर जाने से उसके नीचे अभिषेक, गौरव व उनका साथी दब गए। इस हादसे में अभिषेक की मौके पर ही मौत हो गई। मामले में आयोग ने कलेक्टर मुरैना से एक माह में जवाब मांगा है। आयोग ने यह भी कहा है कि मृत बालक को परिजनों को देय मुआवजा राशि प्राप्त कर ली गई है या नहीं, इस बारे में भी प्रतिवेदन दें।

चौथा मामला बैतूल जिले का है। यहां बैतूल-इंदौर फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी के एक मजदूर की ऊंची दीवार से गिरने से मौत हो गई। बीते बुधवार शाम हुई इस घटना की सूचना गुरुवार सुबह पुलिस को दी गई। हादसे की सूचना मिलते ही चिचोली पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल का जायजा लिया। पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी। बैतूल-इंदौर फोरलेन का निर्माण एक बड़ी कंपनी कर रही है। कंपनी में एक ठेकेदार के पास काम कर रहे मजदूर कृष्णा पिता मधु निरापुर निवासी चिचखेड़ा, थाना सांईखेड़ा की ऊंची दीवार से नीचे गिरने पर दर्दनाक मौत हो गई है। हादसे की सूचना बीते गुरुवार की सुबह चिचोली पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को चिचोली सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भेज दिया गया। मामले में आयोग ने कलेक्टर बैतूल से प्रकरण की जांच कराकर एक माह में जवाब मांगा है। आयोग ने यह भी कहा है कि मृतक को परिजनों को देय मुआवजा राशि प्राप्त कर ली गई है या नहीं, इस बारे में भी प्रतिवेदन दें।

आयोग में आवेदन देने पर हुआ आवेदक की समस्या का निदान

म.प्र. मानव अधिकार आयोग में आवेदन करने पर एक शासकीय सेवक के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयकों का भुगतान संबंधी शिकायत/समस्या का निदान हो गया है। आवेदक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, सतपुड़ा भवन, भोपाल में सहायक ग्रेड-एक के पद पर कार्यरत् है। इन्होंने आठ अगस्त 2022 को आयोग में दिये आवेदन में लेख किया था कि वे स्थाई रूप से दिव्यांग है और स्वयं के अस्थि के गंभीर रोग ‘‘फायब्रोस डिस्प्लेसिया‘‘ के चल रहे निरंतर इलाज के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयकों को स्वीकृत कराने का अनुरोध किया था। आयोग ने प्रकरण क्रमांक 5397/भोपाल/2022 दर्जकर आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, मप्र शासन, भोपाल से जवाब मांगा। विभागीय अपर संचालक ने आयोग को प्रतिवेदन दिया कि आवेदक के लंबित चिकित्सा देयकों के भुगतान की कार्यवाही प्रचलित है एवं आवेदक द्वारा आगामी प्रस्तुत चिकित्सा देयकों के संबंध में आयुक्त, स्वास्थ्य सेवायें, मप्र शासन द्वारा नवीन चिकित्सा परिचर्या नियम 2022 के अनुसार कार्यवाही की जा सकेगी। दिव्यांग कर्मचारी को इन नियमों में पृथक से किसी भी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है। विभागीय प्रतिवेदन के बाद आयोग द्वारा आवेदक से भी प्रतिक्रिया ली गई। प्रतिक्रिया में आवेदक ने समस्या का निराकरण हो जाने की पुष्टि कर मामला समाप्त करने का अनुरोध किया। चूंकि आवेदक की समस्या का अंतिम निदान हो चुका है, इसलिए आयोग में यह मामला अब समाप्त कर दिया गया है।

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