जबलपुर। हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन को यह स्पष्ट करने कहा है कि वर्तमान में राज्य में कुल कितने तालाब अस्तित्व में हैं और उनके संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने साफ किया कि यह जानकारी इसलिए आवश्यक है, ताकि तालाबों की नैसर्गिक संरचना कायम रखे जाने के संदर्भ में समुचित दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें। राज्य में तालाबों पर अतिक्रमणों के विरुद्ध निरंतर शिकायतें व याचिकाएं प्रस्तुत होती रहती हैं। इसलिए यह जानना आवश्यक हो जाता है कि तालाबों का मूल प्रयोजन से इतर किन उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति के लिए उपयोग किया जा रहा है। लिहाजा, राज्य शासन की ओर से इस सिलसिले में तथ्यात्मक जानकारी पेश की जाए। अगली सुनवाई जनवरी के तीसरे सप्ताह में होगी। माढ़ोताल को सुखाने की साजिश से जुड़ा मामला : यह मामला जबलपुर के माढ़ोताल में अतिक्रमण, अवैध कब्जे और उसे सुखाने की साजिश के उजागर होने से जुड़ा है। इस सिलसिले में समाचार-पत्रों में समय-समय पर प्रकाशित खबरों पर संज्ञान लेकर हाई काेर्ट ने स्वत: संज्ञान के आधार पर जनहित याचिका की सुनवाई शुरू की है। इस जनहित याचिका का दायर स्थानीय से प्रादेशित करते हुए प्रदेश के सभी तालाबों की जानकारी मांग ली है।
स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी : हाई कोर्ट के पूर्व नोटिस के जवाब में राज्य शासन की ओर से अवगत कराया गया कि माढ़ोताल के अतिक्रमण हटाने और उसका संरक्षण करने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। शीघ्र ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा। यह जवाब अभिलेख पर लेकर हाई कोर्ट ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट बताएं कि अतिक्रमण हहटाए गए हैं या नहीं। वहीं दूसरी ओर अधिवक्ता आरपी कनौजिया ने हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि माढ़ोताल ही नहीं शहर के कई शासकीय तालाब हैं, जिनका निजीकरण कर उन्हें बेचा जा रहा है तिलहरी, अमखेरा, तेवर, सिलुआ, बूढ़ा सागर समेत कई ऐसे तालाब हैं, जो कि शासकीय मद में दर्ज हैं, किंतु उन्हें निजी हाथों में देकर अवैध निर्माण कराया जा रहा है। इस पर कार्रवाई अपेक्षित है। हाई कोर्ट संज्ञान वाली जनहित याचिका के साथ इस बिंदु को भी समाहित करे।

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