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सामान खरीदने के बाद बिल लेने वालों को पुरुस्कृत करेगी मध्य प्रदेश सरकार

السبت، 5 نوفمبر 2022

/ by Today Warta



भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में जीएसटी के अंतर्गत पंजीकृत विक्रेताओं से माल या सेवा के साथ बिल लेने वाले क्रेता-उपभोक्ता को भी अब राज्य सरकार पुरुस्कृत करेगी। मध्य प्रदेश बिल संग्रहण एवं पुरस्कार योजना के अंतर्गत पुरस्कार की चार श्रेणियां निर्धारित की गई है। राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग ने राजस्व संग्रहण में योगदान के उद्देश्य से योजना में क्रय-विक्रय के बिल संग्रहण पर पुरस्कार निर्धारित किए हैं। प्रत्येक छह माह में कुल 12 क्रेताओं, उपभोक्ताओं का कंप्यूटराईज्ड लाटरी सिस्टम से निर्धारण किया जाएगा। पुरस्कार की राशि क्रेता -उपभोक्ता के द्वारा बताए गए बैंक खाते में हस्तांतरित (ट्रांसफर) की जाएगी। 2018 में प्रारंभ हुई इस योजना में चार बाद बदलाव कर पुरुस्कार के लिए प्रत्येक छह माह में संग्रहित बिलों की चार श्रेणियां बनाई गई हैं। इन बिलों को 15 दिन के अंदर वाणिज्यिक कर विभाग के पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इस योजना में कर मुक्त मालों एवं सेवाओं से संबंधित बिलों को शामिल नहीं किया गया है। पैट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी, पीएनजी एवं मदिरा के बिलों को भी शामिल नहीं किया जाएगा।

चार साल पहले शुरू की थी पुरस्कार योजना

वाणिज्यिक कर विभाग ने एक अक्टूबर 2018 को राजस्व संग्रहण में योगदान के लिए मालों की खरीदी अथवा माल और सेवाओं की प्राप्ति के लिए क्रेताओं-उपभोक्ताओं को प्राप्त होने वाले बिल-बीजकों के संग्रहण एवं पुरुस्कार के लिए मध्य प्रदेश बिल संग्रहण एवं पुरुस्कार योजना जारी की थी। इसमें प्रावधान था कि प्रथम पुरुस्कार के लिए पांच क्रेताओं का चयन किया जाएगा एवं प्रत्येक चयनित क्रेता को दस हजार रुपये की राशि पुरुस्कार स्वरुप दी जाएगी। जबकि द्वितीय पुरुस्कार के लिए दस क्रेताओं का चयन कर प्रत्येक को पांच हजार रुपये एवं तृतीय पुरुस्कार के लिए 15 क्रेताओं का चयन कर प्रत्येक को तीन हजार रुपये की राशि पुरुस्कार स्वरुप दी जाएगी। तीन माह के संग्रहित बिलों पर यह पुरुस्कार देने का प्रावधान था, जिसमें अब बदलाव कर दिया है।

पुरकार श्रेणी - बिल की राशि - बिल पर देय पुरस्कार की राशि

प्रथम पुरस्कार- 200 से 20 हजार रुपये - बिल राशि का 25%

द्वितीय पुरस्कार - 20001 से 50 हजार रुपये - बिल राशि का 20%

तृतीय पुरस्कार - 50001 से एक लाख रुपये - बिल राशि का 15%

चतुर्थ पुरस्कार - एक लाख से अधिक पर - 10% या 20 हजार रुपये

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