जबलपुर। देश के किसी भी नागरिक के साथ सेवा में कमी कहीं भी हुई हो अब वह अपने जिले के उपभोक्ता आयोग से न्याय हासिल कर सकता है। यह सुविधा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में संशोधन से मिली है। इससे पूर्व तक न्याय-क्षेत्र को लेकर दायरा सीमित था। इस समस्या को गंभीरता से लेकर नई अपेक्षाकृत अधिक न्यायपूर्ण व्यवस्था दी गई है। उपभोक्ता मामलों के जानकार अधिवक्ता मनीष मिश्रा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में संशोधन के जरिए उपभोक्ताओं के अधिकार बढ़ा दिए गए हैं। अब वे जिला उपभोक्ता आयोग में 20 लाख के स्थान पर 30 लाख अधिक यानी 50 लाख तक क्षतिपूर्ति की मांग का परिवाद दायर कर सकते हैं। यही नहीं जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश से संतुष्ट न होने पर वहीं पुनराविलोकन परिवाद भी दायर किया जा सकता है। पहले यह सुविधा नहीं थी। इसके लिए सीधे राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील का प्रविधान था। इसी तरह वाद व्यय भी पहले निर्धारित दो से पांच सौ रूपये मात्र से बढ़कर दो से पांच हजार हो गया है। इससे कानूनी लड़ाई में होनेे वाले खर्च की वसूली संभव हो गई है।
दो कोर्ट से जीतने पर हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट जाने की नई व्यवस्था :
उन्होंने बताया कि पहले जिला व राज्य उपभोक्ता आयोग से परिवादी के जीतने पर अनावेदक पक्ष राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग चला जाता था, किंतु अब हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट जाने की नवीन व्यवस्था दे दी गई है। इससे उपभोक्ता व अनावेदक के समक्ष विकल्प बढ़ गए हैं। इसका असर भी विभिन्ना मामलों में नए-नए केस दायर होने की शक्ल में नजर आने लगा है।
क्षतिपूर्ति राशि का 50 प्रतिशत जमा करने की नई शर्त लागू :
अधिवक्ता अरुण कुमार जैन ने बताया कि पहले जिसके विरुद्ध क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का आदेश जिला उपभोक्ता आयोग से पारित होता था, वे 50 प्रतिशत राशि या 25 हजार, जो अधिक हो, वह जमा करके अपील में जाने स्वतंत्र होता था। किंतु अब विकल्प खत्म करके सिर्फ 50 प्रतिशत राशि जमा करने का नवीन संशोधित प्रविधान लागू हो गया है। इससे उपभोक्ताओं के हित का अधिक प्रभावी संरक्षण हो रहा है

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