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बदलेगा खाकी का अंदाज, हाईटेक होगी पुलिसिंग

الجمعة، 6 يناير 2023

/ by Today Warta



राकेश केशरी

कौशाम्बी। जिले में खाकी के गुम इकबाल को बुलंद करने के लिए कई कवायद शुरू की गई है। कानून के रखवालों को योग के जरिए सेहतमंद बनाने व सफारी स्कॉट गठित करने के बाद अब विवेचनाओं के बोझ को कम किया जाएगा। इसके लिए अब थानों को पेपरलेस बनाने की व्यवस्था शुरू की जाएगी। विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नए साल में इसका आधुनिकीकरण किया जाएगा। जिसके तहत थानों पर आने वाले मामलों की सभी सूचनाएं सॉफ्टवेयर में सुरक्षित होंगी। यही नहीं अपराधियों पर नकेल कसने व पुलिसिया सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए जिले के 14 थानों के अंतर्गत कई नई पुलिस चैकियां स्थापित की जाएंगी। इससे न केवल कानून व्यवस्थ बेहतर होगी, बल्कि असामाजिक तत्वों में लिप्त रहने वालों के हौंसले भी पस्त होंगे। करीब दो माह पहले पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने जिले में कदम रखते ही सबसे पहले कानून के रखवालों को सेहतमंद बनाने के लिए थानों पर योग व पीटी की पहल शुरू की। ताकि पुलिसकर्मी फिट व एक्टिव होकर अपनी ड्यूटी निभाएं। इसके लिए थानों पर महिला आरक्षी के माध्यम से नियमित योगाभ्यास को अनिवार्य बना दिया। थानों पर तैनात प्रभारी निरीक्षक, उपनिरीक्षक,आरक्षी समेत सभी पुलिसकर्मियों को अनुलोम-विलोम, विश्राम-सावधान समेत योग के विभिन्न आसन सिखाए गए। यही नहीं एसपी ने थानों पर सूचक के रूप में घंटे लगवाए। ताकि कोई घटना होने पर दीवान व मुंशी के घंटा बजाते ही पुलिसकर्मी सक्रिय होकर एकत्र हो जाएं। इन प्रयोगों के सफल होने के बाद एसपी का सफर यहीं रूका नहीं, उन्होंने पुलिसकर्मियों को फरार्टा अंग्रेजी बोलने का फरमान सुना दिया। बिना अंग्रेजी में प्रार्थना पत्र के अवकाश पर पाबंदी लगा दी। नतीजा रहा कि आज पुलिसकर्मी अंग्रेजी में प्रार्थना पत्र लिख रहे हैं। जबकि वीआइपी ड्यूटी के दौरान पुलिस का अलग अंदाज दिखे, इसके लिए पुलिस अधीक्षक ने सफारी स्कॉट का गठन किया। सफारी दस्ते में 200 जवान रिजर्व किए गए। वीआईपी ड्यूटी में ये जवान नेवी ब्लू सफारी सूट, काला चश्मा और काला जूता पहने नजर आएंगे। बड़े कार्यक्रमों में पिस्टल से लैस इन जवानों की ड्यूटी का तरीका भी बदला नजर आएगा। जबकि जिले के विभिन्न थानों में तैनात महिला सिपाहियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए उन्हें बीट व पैरोकार की जिम्मेदारी दी गई है। महिला आरक्षी के बीट में तैनात होने से विभिन्न मामलों की पीड़िताएं अपनी बात आसानी से उनसे साझा कर पाती हैं।

सिपाहियों के हाथ में होगी ग्राम पंचायतों की कमान

गांवों में आए दिन रास्ते व बच्चों को लेकर मामूली झगड़े, सांप्रदायिक विवाद का रूप ले लेते हैं। मौके पर ही ऐसे मामले आपसी सुलह-समझौते से निपट जायं तो पुलिस का काम आसान होगा। अपराध में भी कमी आएगी। नए साल पर पुलिस अधीक्षक ने अभिनव पहल का खाका तैयार किया है। गांव पंचायत स्तर पर सुरक्षा व विवादों के निपटारे के लिए कांस्टेबल नामित किए हैं। यह मामले को निपटाएंगे ही नहीं, विवाद थाने या फिर एसपी के दरबार पहुंचा तो वे जवाबदेह भी होंगे।


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