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शिकारियों के निसानें पर साइबेरियन पक्षी,वनविभाग की अनदेखी से हो रहें शिकार

الاثنين، 2 يناير 2023

/ by Today Warta



राकेश केशरी

कौशाम्बी। गंगा नदी के तराई इलाको में इन दिनों उन परिंदों का शिकार किया जा रहा है,जो विदेशी मेहमान कहलाते है। विदेशी परिंदों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते शिकारी इन मेहमानो की कत्ल कर अपना निवाला बनाते है। सूत्रों के मुताबिक कोखराज थाना क्षेंत्र के बाईपास स्थित गंगा नदी के तराई इलाको में इन दिनों भोर में शिकारी सिंगल बैरल गन से विदेशी परिदों का शिकार करते बताये जा रहे। सूत्र बताते है की यह शिकारी तराई इलाके के ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले है। जो गंगा नदी के किनारे साइबेरियन व सुर्खाब नामक विदेशी परिंदो का खुलेआम शिकार कर अपना निवाला बना रहें हैं। शरदश्रतु में यह विदेशी परिंदे हर वर्ष प्रयागराज संगम तट पर आते है। जिसमे से परिंदों का एक झुंड कौशाम्बी के अलवारा झील समेत गंगा नदी के तराई इलाके में भी मंडराते है। प्रवासी परिंदों की सुरक्षा की जिम्मेदारी का निर्वाहन करने वाला वन्य विभाग के अधिकारियों के अनदेखी के चलते यह विदेशी मेहमान शिकारियों का निशाना बनते बताये जा रहे है।

परिंदों के कुम्भ में शिकारियों का आतंक

मेहमान परिंदों के साथ देसी परिंदों की अलवारा झील में बसी एक नई दुनिया में शिकारियों के आतंक का साया मडराने लगा है। शिकारियों के नापाक मंसूबो से विदेशी परिंदों की जान पर बन आई है। शिकारी उन पर कहर बनकर टूट पड़े हैं। रोजाना सैकड़ों की तादाद में साइबेरियन पक्षियों का शिकार होता है। पक्षियों के मांस की तस्करी भी बड़े पैमाने पर शुरू हो गई है। बतां दें की 2250 बीघे में बनी इस झील में इन पक्षियों के आने का कौशाम्बी के लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। शिकारी भी इनके आगमन को लेकर बेकरार रहते हैं। अलवारा के ग्राम प्रधान का कहना हैं की बेजुबान परिंदे झील की शोभा हैं लेकिन शिकारियों के लिए इन विदेशी मेहमानों का मांस उनकी धन कमाने का साधन बन गया है। साइबेरियन पंछियों के मांस खाने के शौकीन बहुत से लोग हैं। शिकारी इनका बड़े पैमाने पर प्रतिदिन शिकार करते हैं। पहले गोली से इनको मारा जाता था लेकिन बंदूख के शोर से पंछियों के उड़ जाने का खतरा ज्यादा रहता था। इसलिए अब एयर राइफल का इस्तेमाल हो रहा है। गांव के लोग मारने के लिए अब कीटनाशक पाउडर का प्रयोग कर रहे हैं। जिसकी वजह से सुबह झील में प्रतिदिन 40 से 50 पक्षियों के शव उतराते मिलते हैं। वही वन अधिकारी कौशाम्बी का कहना है की साइबेरियन पंछियों का शिकार और इनकी तस्करी ने तेजी पकड़ी तो इलाकाई लोगों की जुबान भी विरोध के सुर में बोलने लगे। महज 100 से 200 रुपये के लिए इन विदेशी मेहमानों का कत्ल किया जाता है। जिले के कोने.कोने में इनका मांस तस्करी कर बेचा जा रहा है। इन परिंदों की सुरक्षा की जिम्मेदार वन विभाग की होती है लेकिन वन विभाग के कर्मचारी कभी झील की ओर रूख नहीं करते। नतीजतन विदेशी परिंदों का शिकार बेखौफ हो रहा है। वनाधिकारी के मुताबिक परिंदों के सुरक्षा के नजरिए से एक फारेस्टर और दो फारेस्ट गार्ड की ड्यूटी लगातार लगाई गई है।


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