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आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित तरहार क्षेत्र के ग्रामीण

الثلاثاء، 18 أبريل 2023

/ by Today Warta



संजय धर द्विवेदी

चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए सारे दावे फेल,ग्रामीणों में आक्रोश

लालापुर, प्रयागराज। जनपद के बारा तहसील अंतर्गत लालापुर तरहार क्षेत्र आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है....। विकास के नाम पर मंचों से जनप्रतिनिधि-प्रशासन भले ही कितना ही ढिंढोरा पीट ले लेकिन ग्राम पंचायतों के अंतर्गत जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आ रही है। आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के लिए लोग तरस रहे हैं। सरकार के जनप्रतिनिधि के जिम्मेदारों को इससे कोई सरोकार नहीं है, जिससे तरहार क्षेत्र के ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा  है...। तरहार क्षेत्र की प्रमुख ग्राम पंचायत  लालापुर जो करीब 30 गांवों का प्रमुख केंद्र भी है। यहां पर व्यापारिक सौदों के साथ-साथ शैक्षणिक गतिविधियों के लिए व्यापारियों, शिक्षार्थियो का आना-जाना लगा रहता है। बावजूद इसके यहां पर संसाधनों की कमी के कारण ये विकास की दौड़ में पिछड़ रहा है। शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी का संचालन तो वृहद स्तर पर कराया जा रहा है। इसमें सैकड़ो बच्चे दर्ज हैं लेकिन बच्चों को बैठने के लिए ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों के पास भवन आज तक मुहैया नहीं हो पाया है। पूर्व में जिस भवन में केंद्र संचालित हुआ करता था वह पूर्ण रुप से जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। वर्तमान में कई अन्य शासकीय प्राथमिक शाला के जर्जर भवन में मजबूरन संचालित कराना पड़ रहा है। जहां पोषण आहार का वितरण, गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, जांच के काम खुले में करने पड़ते हैं।

स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी.....

सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध न हो पाना चिंता का विषय बना हुआ है। करीब 30 गांवों का प्रमुख केंद्र होने के बाद भी लालापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ दो कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। यहां पर डॉक्टरों की कमी के कारण न तो पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ग्रामीणों को मिल पा रहा है न ही उचित परामर्श।

पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीण.....

लालापुर में सबसे ज्यादा समस्या  पानी को लेकर है क्योंकि ज्यादातर हैंडपंप का पानी खारा है और पीने के पानी के लिए ग्रामीण गर्मियों में दूर दराज से मीठा पानी लेकर आते हैं तब जाकर लोगों की प्यास बुझती है।ग्रामीणों ने पानी की समस्या क्षेत्रीय नेताओं से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से कई बार कहा लेकिन परिणाम शून्य....।क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने बताया कि पानी टंकी मंजूर है सर्वे होगा...पानी टंकी लगेगी।लेकिन सालों से न तो कोई सर्वे हुआ न ही पानी की टंकी लगी....?  नेताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा चुनाव के समय किये गए सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं...।

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