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जनपद के मृतप्राय जलाशयों के सबरेंगे दिन

الثلاثاء، 25 أبريل 2023

/ by Today Warta



इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र

जिलाधिकारी के नेतृत्व में नदी/नालों व जलाशयों का हो रहा पुनरोद्धार

बानई नदी सहित 06 अन्य नदियों पर पुनर्जीवन का कार्य प्रगति पर

बानई नदी के जीर्णोद्धार से 105.65 है0 बंजर भूमि पर सिंचाई के लिए पर्याप्त होगा पानी

421 परिवारों को मिला रोजगार, कृषकों की आय में हुई लगभग 56.48 लाख की वार्षिक वृद्धि

नदी पर पुलिया निर्माण से तीन ग्राम पंचायत आपस में जुड़ीं

परिसम्मपत्ति सृजन के साथ साथ ग्रामीणों को मिला रोजगार

ललितपुर। जिलाधिकारी आलोक सिंह ने बताया कि जनपद में जल संरक्षण की दिशा में शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा नदियों/नालों एवं जलाशयों का पुनरोद्धार कार्य कराया जा रहा है, जिससे जनपद की पानी की समस्या का समाधान तो होगा ही, साथ ही श्रमिकों को अपने ही गांव में रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जनपद के ऐसे नदी/नाले व जलाशय जो मृतप्राय हो चुके थे, उनको चिन्हित कर मास्टर प्लान तैयार कर मनरेगा एवं अन्य विभागों के सहयोग से उन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है। उन्होंने बानई नदी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने बताया कि बानई नदी ग्राम पंचायत खितवांस, खितवांस के टसर एवं सतरवांस से निकलकर ग्राम पंचायत तालगाँव में मिलकर आगे चलकर वानई नदी का रूप ले लेती है। यह नदी ग्राम पंचायत तालगाँव अनौरा, झरकौन एवं कचनौदाकलॉ होते हुये कचनौदा डैम में जाकर मिल जाती है। नदी की लम्बाई लगभग 15 किमी है। बानई नदी के पुनरोद्धार हेतु गनरेगा द्वारा पुल का निर्माण, चैकडेम, नदी का गहरीकरण, वृक्षारोपण एवं सड़क निर्माण कराया गया है, जिस पर कुल 46.65 लाख रू0 व्यय किया गया है। इस कार्य से 421 परिवारों को रोजगार मिला है तथा कृषकों की आय में लगभग 56.48 लाख की वार्षिक वृद्धि हुई है, साथ ही 223 कृषकों की 353 है0 खेती की सिंचाई की गयी है। उन्होंने बताया कि नदी का कार्य पूर्ण हो जाने पर आसपास की 105.65 हे0 बंजर भूमि पर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। बानई नदी के अतिरिक्त जनपद में 06 अन्य नदियों-नॉट नदी, शहजाद नदी, अमझिर नदी, बरुआ नदी एवं खरखरी नदी आदि पर वर्तमान में पुनरोद्धार का कार्य कराया जा रहा है, जिनके पुनरोद्धार से जनपद में पेयजल की समस्या का समाधान हो सकेगा। डीसी मनरेगा ने बताया कि नदी के पुनरोद्धार से परिसम्मपत्ति सृजन के साथ साथ ग्रामीणों को रोजगार प्राप्त हुआ तथा उनकी आजीविका में सुधार एवं आय में वृ़द्ध हुई है। नदी के जीर्णोद्धार से ग्राम पंचायतों में उपलब्ध 105.65 है0 बंजर भूमि पर खेती की जा सकेगी।

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