जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गैर जमानती धाराओं के मामले में थाने से जमानत दे दिए जाने के रवैये पर आश्चर्य जताया। इसी के साथ प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को हलफनामा पेश करने के निर्देश दे दिए। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने साफ किया कि यह मामला महज एक जिले का नहीं, बल्कि प्रदेश स्तरीय पुलिस व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण बेहद गंभीर है। इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपित राजकुमार निषाद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमन पटैल, रूपेश पटेल व सोमनाथ कोरी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि कटनी की कोतवाली पुलिस ने 14 मार्च 2022 को 60 लीटर कच्ची शराब के साथ गिरफ्तार किया और उसी दिन थाने से जमानत पर रिहा कर दिया। इसके बाद नवंबर, 2022 को पुलिस ने विवेचना पूर्ण कर कोर्ट में चालान पेश किया, जहां से आवेदक को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। हाई कोर्ट ने पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करने के बाद शासकीय अधिवक्ता से पूछा कि गैर जमानती अपराध के मामले में आरोपित को थाने से कैसे जमानत दे दी गई। शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि ऐसी विसंगति कई जिलों में पाई गई है। इस दलील को रिकार्ड पर लेकर हाई कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर डीजीपी को जवाब पेश करने के निर्देश दे दिए।
दुष्कर्म के आरोपित व्यापारी संघ के अध्यक्ष को अग्रिम जमानत :
सेशन कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपित चंडाल भाटा ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी संघ के अध्यक्ष बबलू अग्रवाल की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। जमानत अवधि में सभी निर्धारित शर्तों का पालन करने की व्यवस्था दी गई है। आवेदक बबलू की ओर से उसके वकील ने दलील दी कि आवेदक ने ट्रांसपोर्ट व्यापारियों के प्लाट पर हुए कब्जों को हटाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने चंडालभाटा ट्रांसपोर्ट नगर में व्यापारियों के प्लाट से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे प्रशासनिक अधिकारियों ने एक महिला का अतिक्रमण भी हटाया था। दरअसल, उसी महिला की बेटी ने आवेदक के विरुद्ध पुलिस में दुष्कर्म की शिकायत की और जहर खा लिया। सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि उक्त घटनाक्रम को देखते हुए अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर करने योग्य है।

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