राकेश केशरी
कौशाम्बी। कहते है स्वस्थ शरीर और तेज दिमाग जीवन को आसमान छूती ऊंचाईयों तक पहुंचाता है। इसकी शुरूआत छात्र जीवन से करने की सरकारी योजना पूरी तरह विफल है। शिक्षा मंदिरों में खेल के मैदान व व्यायाम शिक्षकों की कमी से इसे कोई मुकाम हासिल नहीं हो पाया है। शरीर को चुस्त दुरुस्त रखने के लिये सभी स्कूल कालेजों में शारीरिक शिक्षा अनिवार्य कर दी गई है। इसके लिये खेल के मैदान व व्यायाम शिक्षक के साथ खेल सम्बन्धी सामान का होना जरूरी है। लेकिन जमीनी हकीकत में सरकारी व सहायता प्राप्त विद्यालयों में तो खेल के छोटे बड़े मैदान है पर शिक्षक नहीं। वही तमाम वित्त विहीन विद्यालयों में जगह का अभाव है। कागजी मैदानों में बच्चे खेलकूद कर स्वस्थ हो रहे है। इन हालातों का इल्म शिक्षा अधिकारियों को भी है। जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार सिंह के मुताबिक सभी स्कूलों में खेल के मैदान व व्यायाम शिक्षक है। कुल मिलाकर जिले भर में सभी स्कूलों के बच्चे सुनियोजित तरीके से शारीरिक शिक्षा प्राप्त कर रहे है। लेकिन इसकी असल हकीकत शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चे ही जान सकते है।

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