जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 55 वर्षीय अभ्यर्थी ने याचिका दायर कर कहा कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर भर्ती के लिए परीक्षाएं तो लेता है पर नियुक्तियां नहीं दे रहा है। याचिका के जरिये आरोप लगाया गया कि वर्ष 1996 से पीएससी ने अभी तक नियुक्ति नहीं दी हैं। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव व आयुक्त व मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है।
याचिकाकर्ता टीकमगढ़ निवासी डा. रमाकांत तिवारी की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता अतिथि विद्वान के पद पर कार्यरत है। उसने वर्ष 2017 में पीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और चयन सूची में भी उनका नाम आया। चयन होने के पांच साल बाद भी वह नियुक्ति का इंतजार कर रहा है याचिकाकर्ता की उम्र बढ़ती जा रही है, यदि कुछ साल और नियुक्ति नहीं मिलती तो वह सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुंच जाएगा। पीएससी और सरकार लाखों उम्मीदवारों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही हैं। याचिका में मांग की गई है कि पीएससी द्वारा चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर को तत्काल नियुक्ति दी जाए। हाई कोर्ट ने प्रारंभिक तर्क सुनने के बाद जवाब-तलब कर लिया।

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