राजेंद्र प्रसाद मिश्र
बारा।समाचार पत्र प्रयाग प्रभात हिंदी दैनिक के यमुनापार प्रभारी ने पत्रकारिता को गहराई से न समझने वाले लोगों के लिए और बात ही बात में पत्रकारों को गालियाँ देने वाले और दलाल समझने वाले लोगों को बताते हुए कहा कि पहले यह जानने की आवश्यकता है कि एक पत्रकार की जिंदगी कैसे गुजरती है ? पत्रकार खुद भूखा रहकर खबर तलाशता है कि कहीं कोई भूखा तो नहीं सो रहा है, एक पत्रकार खुद प्यासा रहकर खबर तलाशता है कि कहीं कोई कुवां तो नहीं सूख गया।पत्रकार वह होता है जो खुद धूप में तपकर खबर तलाशता है कि कहीं कोई महिला या बच्ची के साथ हिंसा तो नहीं हुई या उन्हें मार तो नहीं डाला गया ? पत्रकार वह है कि जो खुद सर्दी में ठिठुर कर खबर तलाशता है कि कहीं कोई नंगे बदन कांप तो नहीं रहा है। पत्रकार वह होता है कि जो बरसात में निकलकर खबर तलाशता है कि कहीं कोई छत तो नहीं टपक रही है, जिससे कोई बड़ी दुर्घटना हो जाये।
पत्रकार वह है जो जनता के लिए जान की बाजी भी लगा देता है लेकिन जब पत्रकार पर कोई आफत आती है तो वही जनता तमाशबीन बन जाती है। अपनी जान जोखिम में डालकर भी दूसरों तक खबर पहुंचाता है, खुद को अंधेरे में रखकर दूसरों तक रोशनी पहुंचाता है पत्रकार उसे कहते हैं।
"न कलम बिकती है, न कलमकार बिकता है,
मँहगाई के दौर में न कोई पत्रकार बिकता है।
लिखते-लिखते हाथ हो जाते हैं लहूलुहान,
तब चंद रुपयों में अखबार बिकता है।।"

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