राकेश केसरी
कौशाम्बी। खुशी के जोश में लोग इतने मगन हो रहे हैं कि उन्हे दूसरों की जान की भी परवाह नहीं रहती। इसीलिए तो तमाम हादसे होने और प्रतिबंध के बावजूद शादी समारोह या अन्य खुशी के मौके पर हवा में फायरिंग करना रुक नहीं पा रहा है। बल्कि दिनों-दिन यह स्टेटस सिम्बल बनता जा रहा है। जबकि जनपद में बीतें वर्ष में कोखराज व सैनी थाना क्षेत्र मे एक.एक मासूम फायरिंग से काल के गाल में समा चुके हैं। शासनादेश के चलते खुशी के मौके पर फायरिंग करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। जिला स्तर पर भी पुलिस प्रशासन द्वारा इसकी रोकथाम के लिए प्रयास किए जाते हैं, लेकिन असलहों के प्रदर्शन में अग्रणी जनपद कौशाम्बी में खुशी के मौके पर फायरिंग एक स्टेटस सिम्बल बन गई है। प्रशासन ने शौकिया फायरिंग रोकने के लिए तमाम तरह के कानून बनाये जैसे कारतूस खरीदते समय पहले खरीदे गये कारतूसों का ब्यौरा देना कि कब, कहां और क्यों प्रयोग किये गये। इसके पीछे शासन की मंशा थी कि कारतूस मिलने में मुश्किल होने से गैर जरूरी कार्यो में फायरिंग में कमी आयेगी। लेकिन लगता है कि शासन की इस कवायद का भी कोई खास फायदा नहीं हो रहा है, लोग किसी न किसी जुगाड़ से कारतूस हासिल कर समारोहों में फायरिंग करने से बाज नहीं आ रहे। नामकरण समारोह, जन्म दिन या लगुन और विवाह समारोह में लाइसेंसी एवं नाजायज असलहों से फायरिंग होना आम हो गया है, भले ही ऐसी फायरिंग अभिशाप साबित हो रहें है।

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