इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र
ललितपुर। तालाबपुरा डोंडाघाट में श्रीमद्भागवत कथा आयोजन कराया जा रहा। इसमें कथा व्यास दीप्ति श्रीजी के मुखार बिंद से के प्रथम दिवस की कथा की शुरुआत से पहले कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में महिला पुरुष बच्चे शामिल हुए। कलश यात्रा के बाद दीप्ति श्रीजी ने पहले दिन की कथा में बताया कि सच्चिदानंदन रूपा भगवान के तीन रूप है, जिनमें सत्य जो कभी मिटाया न जा सके वह है परमपिता परमात्मा, चित- जो प्रभु के भजन में व भगवान की पूजा में एकाग्र होकर मन लगाए, आंनद- वह जो सभी तरह से सुखी है वह परम सुख है। यह सब भगवान है भगवान में बिना समर्पण कुछ सम्भव नही तथा कथा में बताया कि श्रोता भी तीन प्रकार के है, जिसमें एक जो वास्तिविक कथा सुनने आता है। दूसरा वह जो घर से परेशान होकर कथा में सोने आता है। तीसरा सरोता जो सुपाड़ी काटता है अर्थात बात काटने वाला महाराज जी आपने कथा में ये नही सुनाया कोई चुटकुला नही सुनाया आदि ऐसे भी श्रोता है। लेकिन वास्तविक श्रोता हनुमान जी महाराज को कहा गया है। इस मौके पर मुख्य यजमान विनोद साहू, अशोक साहू, संजय साहू, कथा में आशीष तिवारी, राजा हरनारायण सिंह, नीरज तिवारी, ठाकुरदास महाराज, सतीश परिहार, कृष्णकांत साहू, के.के., शिवदयाल साहू, आकाश सेन, देवेंद्र निरंजन, विजय झा, सतीश परिहार, सचिन यादव आदि उपस्थित रहे।

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