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श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन: कनिष्ठ जगत गुरु शंकराचार्य आत्मानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा पावन कथा

السبت، 4 فبراير 2023

/ by Today Warta



मोहम्मद जमाल

उन्नाव। मुख्य यजमान कमलेश पांडेय व श्रीमती मंजू पांडेय और आयोजक यजमान राहुल पांडेय व सुधांशु पांडेय द्वारा श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का आयोजन शेखपुर स्थित पांडेय निवास परिसर में कराया गया है। अनंत श्री विभूषित कनिष्ठ जगत गुरु शंकराचार्य आत्मानंद सरस्वती जी महाराज ने दूसरे दिन श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा के महात्म्य और लोक कल्याण उपायों पर भूमिका रखते हुए शुकदेव जी के जन्म की कथा सुनाई। शुकदेव महाभारत काल के मुनि थे। वे वेदव्यास जी के पुत्र थे। वे बचपने में ही ज्ञान प्राप्ति के लिये वन में चले गये थे। इन्होने ही राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण की कथा सुनायी थी। शुक देव जी ने व्यास जी से महाभारत भी पढा था और उसे देवताओ को सुनाया था। ये मुनि कम अवस्था में ही ब्रह्मलीन हो गये थे।

शुकदेव बारह वर्ष तक माता के गर्भ में रहे। भगवान शिव, पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। पार्वती जी को कथा सुनते-सुनते नींद आ गयी और उनकी जगह पर वहां बैठे एक शुक ने हुंकारी भरना प्रारम्भ कर दिया। जब भगवान शिव को यह बात ज्ञात हुई, तब उन्होंने शुक को मारने के लिये दौड़े और उसके पीछे अपना त्रिशूल छोड़ा। शुक जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा, भागते-भागते वह व्यास जी के आश्रम में आया और सूक्ष्मरूप बनाकर उनकी पत्नी के मुख में घुस गया। वह उनके गर्भ में रह गया। ऐसा कहा जाता है कि ये बारह वर्ष तक गर्भ के बाहर ही नहीं निकले। जब भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर इन्हें आश्वासन दिया कि बाहर निकलने पर तुम्हारे ऊपर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा, तभी ये गर्भ से बाहर निकले और व्यासजी के पुत्र कहलाये। गर्भ में ही इन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का सम्यक ज्ञान हो गया था। जन्म लेते ही ये बाल्य अवस्था में ही तप हेतु वन की ओर भागे, ऐसी उनकी संसार से विरक्त भावनाएं थी। परंतु वात्सल्य भाव से रोते हुए श्री व्यास जी भी उनके पीछे भागे। मार्ग में एक जलाशय में कुछ कन्याएं स्नान कर रही थीं, उन्होंने जब शुकदेव जी महाराज को देखा तो अपनी अवस्था का ध्यान न रख कर शुकदेव जी का आशीर्वाद लिया। लेकिन जब शुकदेव के पीछे मोह में पड़े श्री व्यास वहां पहुंचे तो सारी कन्याएं छुप गयीं। ऐसी सांसारिक विरक्ति से शुकदेव जी महाराज ने तप प्रारम्भ किया। भगवान श्री शुकदेव जी ने पहली बार भागवत शुकतीर्थ मे सुनाई। पांडेय परिवार सहित आरती व पूजन में कथा सूत्रधार भैरव धाम गंगाघाट के संस्थापक पंडित अजय द्विवेदी, कथा समन्वयक व मीडिया प्रमुख मनीष सिंह सेंगर, कथा सेवा मंडल से दुर्गेश दीक्षित,  राहुल कश्यप, अभिषेक शुक्ला, रोहित अवस्थी, विघ्नेश पांडेय, विजय तिवारी, अधिकार तिवारी, पार्थ पांडेय, राहुल वर्मा आदि ने भाग लेकर महाराजश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।

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