राजीव कुमार जैन रानू
छठवें दिन निकाली गई भगवान द्वारिकाधीश की भव्य बारात
सोंरई गांव के दुर्गा महामाई मंदिर प्रांगण में चल रही सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा
मड़ावरा/ललितपुर। भगवान विष्णु के पृथ्वी लोक में अवतरित होने के प्रमुख कारण थे, जिसमें एक कारण कंस वध भी था। कंस के अत्याचार से पृथ्वी त्राह-त्राह जब करने लगी तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होता रहा। 11 वर्ष की अल्प आयु में कंस ने अपने प्रमुख अकरुर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियों से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया, लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे गए और अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता वसुदेव और देवकी को जहां कारागार से मुक्त कराया, वही कंस के द्वारा अपने पिता उग्रसेन महाराज को भी बंदी बनाकर कारागार में रखा था, उन्हें भी श्रीकृष्ण ने मुक्त कराकर मथुरा के सिंहासन पर बैठाया।
उन्होंने बताया कि रुकमणी जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थी, जो विष्णु रूपी श्रीकृष्ण से विवाह करने को इच्छुक थी। लेकिन रुकमणी जी के पिता व भाई इससे सहमत नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने रुकमणी के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को भी विवाह के लिए आमंत्रित किया था, जैसे ही यह खबर रुकमणी को पता चली तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई और काफी संघर्ष हुआ युद्ध के बाद अंततः श्री कृष्ण रुकमणी से विवाह करने में सफल रहे।
इस तरह सोंरई गांव के दुर्गा मंदिर प्रांगड़ में चल रही भागवत कथा के छठवे दिवस श्रीमद्भागवत कथा बाचक रमाशंकर तिवारी 'मधुर व्यास' ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का बखान किया। आयोजन समिति ने बताया कि दिन में नगर के प्रमुख मार्गों से होकर द्वारिकाधीश की भव्य बारात (शोभायात्रा) निकाली गई। तथा रात्रि में समस्त बैवाहिक रस्में कथा स्थल मंदिर परिसर में पूरे बिधि-विधान पूर्वक सम्पन्न होगी।
आयोजन को सफल बनाने में जय माँ महामाई महिला मण्डल व ग्रामीणों की ओर से अपार सहयोग मिल रहा, तो वहीं आचार्य सूर्यकांत शास्त्री, संगीतकार अमित पुरोहित, अनुज पुरोहित, दरयाव, गुल्ली महाराज के प्रयास भी सराहनीय हैं।

Today Warta