इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र
ललितपुर। जी हां हम बात कर रहे हैं भारत देश की रीढ़ कहें जाने वाले किसान की। आलम यह है कि सरकार किसानों की आय वृद्धि एवं दोगुनी के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन किसान की बिडम्बना या आफत कहें जहां बुबाई का समय आता है तो महंगे खाद, बीज और दवा आदि लेकर फसलों की बुबाई करते हैं और अन्नाधुन्ध बिजली कटौती और रात-रात भर जागकर फसल में पानी, जानवरों से रखवाली करके फसल तैयार करता है और जैसे तैसे फसल तैयार करके गल्ला मण्डी लाता है, तो सस्ते दामों में मजबूरन फसल ओने पोने दामों में बेचने को मजबूर हो जाता है। बता दें कि जहां फसल बुबाई के समय मटर के बीज का रेट आठ हजार प्रति कुन्टल से नौ हजार कुंटल था और वहीं आज गल्ला मण्डी में मटर का रेट भाव तीन हजार रूपए प्रति क्विंटल से कम हैं। यहीं हाल चना, गेहूं, मसूर आदि का है। महंगी होती खेती से जहां किसान कर्ज में डूबते जा रहें हैं, वहीं किसान कर्ज के तले दबने के कारण किसान कार्डो, सोसायटी तथा साहूकारों के कर्ज तले दबकर आत्महत्याएं कर रहे हैं। सरकार सरकारी मूल्य भी फसलों का तय किए हैं लेकिन उस रेट का लाभ सिर्फ दलाल टाईप के किसान ही लाभ ले पाते हैं। पूर्व में भी ललितपुर जनपद के किसान लुटते आ रहें थें,और आज भी लुट रहे, कृषि, उद्यान, में दलालों का बोलबाला है,आखिर कैसे होगी किसानों की आय दोगुनी,आने बारे समय में एक मात्र सपना रह जायेगा किसानों की आय दोगुनी। किसानों की विभिन्न समस्याओ को लेकर बहुत जल्द एक पदयात्रा ललितपुर जनपद में निकालकर हस्ताक्षर अभियान चलाकर उ प्र सरकार को अवगत कराया जाएगा।

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