आत्माराम त्रिपाठी
बाँदा। बुंदेलखंड का बाँदा आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। पानी, बिजली, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों के सवाल लगातार खड़े हैं, लेकिन समाधान की रफ्तार को लेकर जनता में बेचैनी बढ़ती जा रही है।
बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए.एस. नोमानी ने जिले की बदहाल स्थिति पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि कहीं लोगों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिल रहा है तो कहीं बिजली की अनियमितता आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने से युवाओं और परिवारों को रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं के खिलाफ सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस है, तो फिर बाँदा की बेरोजगारी, पेयजल संकट, बिजली की अनियमितता और लगातार हो रहे पलायन पर इसका असर जमीन पर कब दिखाई देगा?
नोमानी ने कहा कि बाँदा को केवल घोषणाओं और वादों की जरूरत नहीं है। यहां के लोगों को पानी, बिजली, रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन चाहिए। विकास का मतलब केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना है।
उन्होंने कहा कि अब सवाल किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि पूरे बाँदा की जनता का है। आखिर कब बदलेगा बाँदा? कब मिलेगी बुनियादी सुविधाओं की गारंटी? कब युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार मिलेगा और कब पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी?
जनता के इन सवालों का जवाब अब आश्वासनों से नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाले विकास से देना होगा!





