मोबाइल की मोहब्बत में पति का कत्ल, ममता की साजिश से उजड़ा परिवार
शैलेंद्र शर्मा व्यस्त
पीलीभीत। कभी जिस घर में पति-पत्नी और दो बच्चों की हंसी गूंजती थी, आज वहां सन्नाटा पसरा है। एक तरफ पिता की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई, दूसरी ओर मां सलाखों के पीछे पहुंच गई। पीछे रह गए दो मासूम बच्चे, जिनकी आंखों में अब न पिता का सहारा है और न मां का आंचल। लोहरपुरी में हुई उमाशंकर की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल पर बढ़ी नजदीकियों ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। उनका आरोप है कि दांपत्य जीवन में तीसरे व्यक्ति की एंट्री ने रिश्तों की नींव हिला दी और आखिरकार एक पति की जान चली गई। हालांकि, प्रेम संबंध और किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका जैसे सभी पहलुओं की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिजनों के मुताबिक, उमाशंकर परिवार का पेट पालने के लिए गुजरात में मजदूरी करते थे। पत्नी के बुलावे पर वह घर लौटे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि जिस घर की चौखट पर वह अपनों से मिलने आए हैं, वहीं उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी। आरोप है कि पहले उन्हें नशीला पदार्थ मिलाकर पेय पिलाया गया और फिर बेहोशी की हालत में उनकी हत्या कर दी गई।सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब 18 वर्षीय बेटे विवेक ने अपने ही पिता के लिए इंसाफ की गुहार लगाते हुए अपनी मां के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी। जिस मां ने जन्म दिया, उसी पर पिता की हत्या का आरोप लगाना किसी बेटे के लिए कितना कठिन रहा होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद भी आरोपी महिला के चेहरे पर पछतावा दिखाई नहीं दिया। उनका कहना है कि शुरूआती पूछताछ में वह पुलिस को गुमराह करने का प्रयास करती रही। बाद में बेटे के बयान और अन्य परिस्थितियों के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। यदि मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से किसी और की संलिप्तता सामने आती है, तो ग्रामीणों का कहना है कि उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।गांव में आज हर जुबान पर एक ही सवाल है—यदि साथ नहीं निभाना था, तो अलग होने का रास्ता भी कानून देता है। फिर आखिर एक ऐसे व्यक्ति की जान क्यों गई, जो रोजी-रोटी कमाने के लिए परदेस में मेहनत कर रहा था? इस सवाल का जवाब अब पुलिस की जांच और अदालत की प्रक्रिया ही दे पाएगी।उमाशंकर अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी पत्नी जेल में है। लेकिन सबसे बड़ी सजा उन दो बच्चों को मिली है, जिन्होंने एक ही दिन में पिता को हमेशा के लिए खो दिया और मां को कानून के हवाले जाते देखा। यही इस घटना का सबसे दर्दनाक सच है।
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