दिसंबर में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने डीएम को दिए थे जांच के आदेश
पीलीभीत। कलीनगर तहसील में तैनात नायब तहसीलदार अक्षय यादव एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में हैं। पत्रावली निस्तारण में कथित मनमानी और रिश्वतखोरी के आरोपों के बीच यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में है, क्योंकि इससे पहले दिसंबर 2025 में भी उनके खिलाफ मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंची थी। उस समय मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने पीलीभीत के डीएम को जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन शिकायतकर्ता के मुताबिक जांच के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब अधिवक्ताओं की नई शिकायत के बाद एक बार फिर नायब तहसीलदार सवालों के घेरे में हैं।दिसंबर 2025 में कलीनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम मथना जप्ती निवासी नरिंदर कौर पत्नी हरदीप सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि उनकी आईजीआरएस संख्या 12151250190737 का गलत निस्तारण किया गया। शिकायत में कहा गया कि तत्कालीन एसडीएम कलीनगर महिपाल सिंह और नायब तहसीलदार अक्षय यादव ने शिकायत के तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर उच्च अधिकारियों को गुमराह किया।पत्र में आरोप लगाया गया कि विवादित भूमि को अकृषक घोषित कराने की कार्रवाई फर्जी नोटरी के आधार पर और सह-खातेदारों की सहमति के बिना कराई गई। शिकायतकर्ता का यह भी कहना था कि न्यायालय ने केवल मुकदमे के दौरान गाटा संख्या 620 पर यथास्थिति बनाए रखने और संपत्ति के शांतिपूर्ण कब्जे में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद राजस्व अधिकारियों ने कथित रूप से न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या कर भूमि पर जबरन कब्जा करा दिया।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि न्यायालय ने कहीं भी निर्माण कराने या कब्जा दिलाने का आदेश नहीं दिया था, लेकिन लगभग चार माह बाद मौके पर पहुंचकर नायब तहसीलदार अक्षय यादव ने कथित रूप से जबरन कब्जा दिला दिया। शिकायतकर्ता ने एसडीएम और नायब तहसीलदार पर मिलीभगत और अनुचित लाभ लेकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया।नरिंदर कौर ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज होने के बाद 12 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने पीलीभीत के डीएम को प्रकरण की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए थे। जांच के बावजूद नायब तहसीलदार के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब पूरनपुर के अधिवक्ता मुकेश गुप्ता और नौशाद अली द्वारा पत्रावली निस्तारण में मनमानी और कथित रिश्वतखोरी की शिकायत मुख्यमंत्री से किए जाने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार जांच के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।








