नई दिल्ली। छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में क्या सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि ऐसा करने से भविष्य में गलत मिसाल बनेगी, जबकि मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि युवाओं के साथ सख्ती नहीं, बल्कि संयम और संवाद की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को किसी राजनीतिक फैसले के आधार पर वापस लिया गया, तो यह भविष्य के आंदोलनों के लिए खतरनाक मिसाल बन जाएगी। उन्होंने आगाह करते हुए कहा, कल जेनरेशन अल्फा, बीटा, डेल्टा भी आएगी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि हाल के छात्र प्रदर्शनों में हिंसा से जुड़े मामलों को केवल किसी राजनीतिक समझौते के आधार पर वापस न लिया जाए चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने इस मामले को छात्र प्रदर्शनों से जुड़े अन्य मामलों के साथ जोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जा सकती हैं। मनीष कुमार सोलंकी की ओर से दायर याचिका में प्रदर्शन के आयोजकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील रिजवान अहमद ने कहा, यह प्रदर्शन मंत्री और पुलिस की जवाबदेही को लेकर था। हम इसे स्वीकार करते हैं। 15 दिन बीत चुके हैं। लेकिन आयोजकों की जवाबदेही का क्या? वे एक चैनल से दूसरे चैनल पर जाकर भड़काऊ बयान दे रहे हैं और आग को शांत करने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, इन तथाकथित आयोजकों की जवाबदेही कहां है? मैं उन्हें तथाकथित आयोजक इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यह कोई पंजीकृत संगठन नहीं है। उनका इशारा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की ओर था, जिसने नीट 2026 पेपर लीक के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। रिजवान अहमद ने कहा कि कानून के मुताबिक किसी भी सभा या प्रदर्शन के दौरान अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए आयोजक भी जिम्मेदार होते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकारप्रदर्शनकारियों की मांग मानते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने पर सहमत हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भविष्य में गलत उदाहरण बनेगा।
युवाओं के साथ सख्ती नहीं, बल्कि संयम और संवाद की जरूरत: मुख्य न्यायाधीश
By Suresh Pal
On: August 5, 2026 10:56 PM
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