लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र विपक्ष के लगातार हंगामे की भेंट चढ़ गया और कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण, शिक्षक भर्ती और अनुपूरक बजट को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने रहे। अध्यक्ष ने सदन की गरिमा पर चिंता जताते हुए भावुक प्रतिक्रिया भी दी। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन में मंगलवार को हुई घटनाओं पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि वे इस बात पर गंभीरता से विचार करेंगे कि क्या वे इस पद के योग्य हैं। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ देर के लिए गंभीर माहौल बन गया। इससे पहले विधानसभा शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के विधायकों ने 6900 शिक्षक भर्ती और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। सपा विधायक अतुल प्रधान दानपेटी लेकर विधानसभा पहुंचे और आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को सदन के साथ-साथ जनता के बीच भी उठाएगी। बुधवार को अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान भी विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे ही चर्चा के लिए खड़े हुए, सपा विधायकों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर पहले चर्चा कराने की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के रवैये को शर्मनाक बताते हुए कहा कि अनुपूरक बजट प्रदेश की 25 करोड़ जनता से जुड़ा विषय है और इसकी चर्चा का एजेंडा पहले से तय था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का न तो चर्चा में विश्वास है और न ही संवैधानिक परंपराओं में। दरअसल, दूसरे दिन मंगलवार को भी इसी मुद्दे पर सदन में भारी हंगामा हुआ था। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान सपा विधायक सचिन यादव द्वारा उनकी तस्वीर लहराने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना नाराज हो गए थे। उन्होंने सचिन यादव को पूरे मानसून सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया और कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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