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लेखपालों का शासन को अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानीं तो 5 अगस्त से कामबंद आंदोलन

On: August 2, 2026 8:03 AM
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पीलीभीत। राजस्व व्यवस्था की अहम कड़ी माने जाने वाले लेखपाल अब अपनी लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की तहसील उपशाखा पूरनपुर ने शासन और राजस्व परिषद को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी छह सूत्रीय मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो 5 अगस्त 2026 से प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। आंदोलन के तहत लेखपाल विभिन्न विभागीय और आॅनलाइन कार्यों का बहिष्कार करेंगे। इससे राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।संघ के तहसील अध्यक्ष शिशुपाल सिंह और तहसील मंत्री आकांक्षा राजपूत के नेतृत्व में लेखपालों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से अध्यक्ष, राजस्व परिषद लखनऊ को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में कहा गया कि लंबे समय से मांगें लंबित होने के बावजूद शासन स्तर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे लेखपालों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
संघ की प्रमुख मांगों में अंतरमंडलीय स्थानांतरण प्रक्रिया को तत्काल शुरू करना शामिल है। संघ का दावा है कि वर्ष 2025 में पोर्टल पर 2,669 लेखपालों ने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। बड़ी संख्या में लेखपाल अपने गृह जनपद से 400 से 800 किलोमीटर दूर तैनात हैं। इसके अलावा चयन वर्ष 2025-26 की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक 29 अप्रैल 2026 को संपन्न होने के बावजूद पदोन्नति सूची जारी न किए जाने पर भी नाराजगी जताई गई है।नव नियुक्त लेखपालों की प्रशिक्षण परीक्षा के परिणाम में देरी का मुद्दा भी उठाया गया है। संघ के मुताबिक चयन वर्ष 2024 के लेखपालों की सितंबर 2025 में हुई प्रशिक्षण परीक्षा का परिणाम अब तक जारी नहीं हुआ है, जिससे उनका स्थायीकरण प्रभावित हो रहा है।लेखपालों ने स्टेशनरी भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये, नियत यात्रा भत्ते के स्थान पर 1500 रुपये वाहन भत्ता और 1000 रुपये प्रतिमाह विशेष भत्ता देने की मांग भी रखी है। साथ ही गैर-राजस्व कार्यों से मुक्ति और ग्राम सचिवालयों में बुनियादी सुविधाओं के बिना बैठने के आदेश का विरोध किया है।संघ ने चेताया कि 5 अगस्त से लेखपाल केवल अपने मूल हल्के का कार्य करेंगे और अतिरिक्त प्रभार से संबंधित बस्ते व फाइलें तहसील कार्यालय में जमा कर देंगे। सभी प्रकार के आॅनलाइन कार्यों का भी बहिष्कार किया जाएगा। पदाधिकारियों ने कहा कि मांगों की अनदेखी के कारण यदि जनता को परेशानी होती है या राजस्व कार्य प्रभावित होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी शासन और राजस्व परिषद की होगी।
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