आत्माराम त्रिपाठी
बांदा। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दिए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ की लंबे समय से लंबित इस मांग को भाजपा जिलाध्यक्ष कल्लू सिंह राजपूत ने समर्थन देते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर शीघ्र शासनादेश जारी कराने की मांग की है।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अब तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल सका है। पांच सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री की ओर से शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षामित्रों और रसोइयों के लिए कैशलेस उपचार की घोषणा की गई थी, लेकिन शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं किया गया। इसके बाद संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने शासन स्तर पर कई प्रत्यावेदन दिए। विभाग की ओर से आवश्यक सूचनाएं भी एकत्र की गईं, लेकिन चार फरवरी 2026 को जारी शासनादेश में भी इन कर्मचारियों को सुविधा से बाहर रखा गया।
संघ का कहना है कि नौ फरवरी 2026 से शुरू हुए विधानसभा सत्र के दौरान इनके लिए बजट में प्रावधान किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अभी तक शासनादेश जारी नहीं हो सका है। कर्मचारियों का कहना है कि अल्प वेतन में परिवार का भरण-पोषण करने वाले इन कर्मचारियों के लिए गंभीर बीमारी की स्थिति में उपचार का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालयों के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना कर्मचारी कल्याण के साथ ही जनहित में भी आवश्यक है।
जिलाध्यक्ष के समर्थन के बाद शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है। संघ के जिलाध्यक्ष कामता प्रसाद, कोषाध्यक्ष राजकरण सिंह और जिला मंत्री शिव ओम गर्ग समेत राममिलन यादव, राजेंद्र कुमार सिंह, नवल किशोर गुप्ता, राकेश कुमार गुप्ता, राकेश कुमार विश्वकर्मा, शिव कुमार, यतिन मिश्रा, दिलीप कुमार शुक्ला, कमलेश कुमार, लालाराम यादव, अवधेश कुमार, गुड्डू, विनोद कुमार और शिवपाल आदि ने भाजपा जिलाध्यक्ष का आभार जताया। पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से शीघ्र शासनादेश जारी कर कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ देने की मांग की।








