बारा खास में आज पंचम दिवस शुक्रवार को स्कंदमाता का पूजन किया गया। मां स्कंदमाता के विषय में विशेष जानकारी देते हुए यज्ञाचार्य श्री नरेन्द्र प्रसाद तिवारी (व्यास जी) ने बताया कि स्कंदमाता का पूजन करने से सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और निःसन्तान लोगों को संतान सुख की भी प्राप्ति होती है।सर्वप्रथम मन में सवाल यह आता है कि माँ स्कंदमाता कौन हैं और इनके अवतार की क्या कथा है?चार भुजाओं वाली माँ स्कंदमाता देवी पार्वती या माँ दुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं।ये चार भुजाओं वाली माता सिंह पर सवारी करती हैं।इनके हाथ में कमल पुष्प होता है और दूसरे हाथ से अपने पुत्र स्कन्द कुमार यानी भगवान कार्तिकेय को पकड़ी हैं।भगवान कार्तिकेय को ही स्कन्द कुमार कहते हैं और स्कंदमाता का अर्थ होता है स्कन्द कुमार की माता। पौराणिक कथाओं के अनुसार संसार में जब तारकासुर का अत्याचार बढ़ने लगा ,तो सभी देवी-देवता, मनुष्य, गन्धर्व, ऋषि-मुनि आदि चिंतित हो उठे और माता पार्वती जी से तारकासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगे। तत्पश्चात आदिशक्ति ने अपने तेज से छह मुखों वाले बालक स्कन्द कुमार को जन्म दिया।आगे चलकर उनके हाथों ही तारकासुर का अंत हुआ और उसकेअत्याचारों से मुक्ति मिल गई, इस प्रकार भगवती दुर्गा का पांचवां स्वरूप माँ स्कंदमाता बनीं। बारा तहसील परिसर में स्थापित मंदिर में माता की मूर्ति की स्थापना की गई है अधिवक्ताओं के अलावा राजस्व विभाग के कर्मचारियों एवं ग्रामीणों ने माता का पूजन किया

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