राकेश केसरी
प्रतिषेध अधिनियम के प्रति अधिकारी नही हैं संजीदा
कौशाम्बी। लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम की लकीर पीटी जा रही है। जिलें में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आज तक एक भी मामला नहीं दर्ज करा पाए हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच भी नहीं की जा रही और न ही अल्ट्रासाउंड केंद्र सही सूचना उपलब्ध कराते हैं। नियमों की अनदेखी कर गर्भवती महिलाओं के गर्भ भू्रण की जांच करके बालक या बालिका होने की बात दी जाती है। बतां दें कि सूचना में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड का पूरा विवरण दिया जाना होता है। पर केंद्र संचालक इसकी लकीर पीट रहे हैं। बताया जाता है कि वह सिर्फ औपचारिकता भर के लिए आधी.अधूरी सूचना भेजते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी उनकी सूचनाओं का सत्यापन करने को जरूरी नहीं समझते। बताया जाता है कि यदि कोई महिला स्वेच्छा से या अपने परिजनों के दबाव में गर्भ में पल रहे भू्रण के बालक या बालिका होने की जानकारी करना चाहता है तो उसे अल्ट्रासाउंड के लिए काम करने वाले दलालों से संपर्क करना पड़ता है। दलालों के जरिए भू्रण लिंग की पहचान का धंधा जोर पकड़ रहा है। ढाई से पांच माह के मध्य गर्भवती महिलाओं में बिना किसी दिक्कत के इस तरह की जांच कराने का चलन बढ़ा है। भ्रूण की पहचान होने के बाद गर्भपात कराए जाने की योजना को अंजाम दिया जाता है। इस तरह के प्रकरणों को सूचना में शामिल न किए जाने की बात भी कही जा रही है। जनपद में एक दर्जन से ज्यादा अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम के प्रति अधिकारी कितना संजीदा हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनवरी से अब तक कितनी गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड हुआ,इस सवाल का जवाब सीएमओ डा0 सुष्पेन्द्र कुमार के पास मौजूद नहीं मिला।

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