धान रोपाई के चरम मौसम में किसानों की बढ़ी चिंता; नहर कोठी की कथित लापरवाही पर फूटा आक्रोश, बोले—जल्द पानी नहीं मिला तो आंदोलन होगा
आत्माराम त्रिपाठी
बांदा। मानसून की बारिश के बीच भी अन्नदाता सिंचाई के पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। धान रोपाई का मौसम चरम पर है, लेकिन ग्राम रिसौरा से निकली केन नहर की गुलाबा नंबर 13 में पानी नहीं पहुंचने से सैकड़ों बीघा खेतों में खड़ी फसल और रोपाई की तैयारी संकट के मुहाने पर पहुंच गई है। किसानों का आरोप है कि नहर कोठी पनगरा के अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित उदासीनता तथा लापरवाही के कारण समय पर पानी नहीं मिल पा रहा है। किसानों के अनुसार, मुख्य नहर में पर्याप्त पानी होने के बावजूद गुलाबा नंबर 13 तक पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इसके चलते खेत सूखे पड़े हैं और धान की रोपाई का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। किसान सुबह से शाम तक नहर की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं, लेकिन पानी न पहुंचने से उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। धान रोपाई के इस निर्णायक समय में सिंचाई का पानी किसानों के लिए जीवनरेखा बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं पहुंचा तो रोपाई के लिए तैयार धान की पौध सूख सकती है और खेतों में खड़ी फसल को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। समय पर सिंचाई की व्यवस्था न होने पर किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है।
फोन घुमाओ, जिम्मेदारी टालो: किसान बोले—अधिकारी बना रहे समस्या को फुटबॉल
समस्या से परेशान किसानों ने जब सिंचाई विभाग के एसडीओ आनंद गुप्ता से फोन पर संपर्क किया तो उन्हें समाधान के बजाय जिम्मेदारी एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी की ओर सरकती नजर आई। किसानों के मुताबिक, एसडीओ ने पहले सिंचपाल से संपर्क करने को कहा। दोबारा बात करने पर उन्हें जेई मुकेश सरोज से संपर्क करने की सलाह दी गई। इसके बाद किसानों ने जेई मुकेश सरोज को फोन किया, लेकिन किसानों का आरोप है कि उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। किसानों का कहना है कि उनकी गंभीर समस्या का समाधान करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी उसे फुटबॉल की तरह एक पाले से दूसरे पाले में उछाल रहे हैं। किसानों ने सवाल उठाया कि जब धान रोपाई का समय निकलता जा रहा है और फसल सूखने का खतरा मंडरा रहा है, तब भी जिम्मेदारों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही? आखिर कब तक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहेंगे और कब तक अन्नदाता विभागीय उदासीनता का खामियाजा भुगतता रहेगा? ग्राम रिसौरा के किसान अनंतराम, प्रभूदयाल, देवीदयाल, अरबिंद, पुन्ना और भैरम सहित सैकड़ों किसानों ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों ने मांग की कि गुलाबा नंबर 13 में बिना किसी देरी के पानी छोड़ा जाए और इस समस्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नहर में पानी नहीं छोड़ा गया और उनकी फसल को नुकसान पहुंचा तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन किसानों की इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करेगा और आखिर कब नहर का पानी खेतों तक पहुंचकर अन्नदाता की सूखती उम्मीदों को राहत देगा?
जेई बोले—केन-बेतवा लिंक परियोजना के कार्य से आई बाधा, एक-दो दिन में मिलेगा पानी
समाचार लिखे जाने के दौरान जेई मुकेश सरोज का फोन आया। उन्होंने बताया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत नहर में कार्य चल रहा है। कार्य में लगी कंपनी द्वारा पाइप कटवाने का काम कराया जा रहा है, जिसके कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में गुलाबा नंबर 13 में पानी पहुंच जाएगा और किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाएगा।
