नई दिल्ली भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भारत ड्रोन एंड रोबोटिक्स मंथन 3.0 सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने घरेलू उद्योग, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थानों और निवेशकों से मिलकर तेजी से अत्याधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही चेताया कि तकनीक अपनाने में देरी भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारी पड़ सकती है। भारत ड्रोन एंड रोबोटिक्स मंथन 3.0′ सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भारतीय वायु सेना (कअऋ) के लिए घरेलू उद्योग और नवाचार क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने का एक स्पष्ट और दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया। वायु सेना प्रमुख का मानना है कि वास्तविक आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अब और तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में कम लागत वाले मानव रहित सिस्टम (अनमैन्ड सिस्टम) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत के रक्षा क्षेत्र को तेजी से बदलती तकनीकों के साथ कदम मिलाकर चलना होगा, क्योंकि थोड़ी-सी भी देरी या हिचकिचाहट भविष्य में भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि परिचालन जरूरतों को स्पष्ट रूप से तय करना उपयोगकर्ता यानी वायु सेना की जिम्मेदारी है। उन्होंने हाल ही में स्थापित ‘डायरेक्टोरेट आॅफ एयरोस्पेस डिजाइन’ को स्टार्टअप, उद्योग और इनोवेटर्स के साथ सीधे संवाद स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत या समस्या की जानकारी हमें ही देनी होगी। हमारे पास ‘डायरेक्टोरेट आॅफ एयरोस्पेस डिजाइन’ है, जो उद्योग, स्टार्टअप और उन सभी लोगों से बातचीत कर सकता है जो हमारी आवश्यकताओं को समझना चाहते हैं। उन्हें यह जानना होगा कि हमें किस प्रकार के ड्रोन, उपकरण या सेंसर चाहिए। पारंपरिक और लंबी मूल्यांकन प्रक्रिया से बचने के लिए भारतीय वायु सेना ने सितंबर में ‘ड्रोनथॉन 2026’ आयोजित करने की घोषणा की है। इसमें कंपनियों से कागजी प्रस्तुतियों या रिकॉर्ड किए गए वीडियो के बजाय अपने उत्पाद का वास्तविक समय में लाइव प्रदर्शन करने को कहा गया है, ताकि तकनीक की क्षमता का सीधे आकलन किया जा सके।
‘टेक्नोलॉजी में देरी मतलब हार, हर पुर्जा यहां बने’ ; वायु सेना प्रमुख
By Suresh Pal
On: July 30, 2026 11:31 PM
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