तहबाजारी व्यवस्था पर गहराए सवाल: सब कुछ वैध है तो ‘मैनेजमेंट’ की चचार्एं क्यों?

Suresh Pal
6 Min Read

कमियां छिपाने का प्रयास या कोई और रणनीति, जांच से ही खुलेगा राज

आत्माराम त्रिपाठी
बांदा। जिला पंचायत की तहबाजारी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले में लगातार ऐसी शिकायतें और आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ स्थानों पर निर्धारित सीमा और स्वीकृत दरों से इतर वाहनों से कथित रूप से मनमानी वसूली की जा रही है। इन आरोपों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय जनचचार्ओं तक बहस तेज है। हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित पक्ष की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
इसी बीच पूरे प्रकरण में एक नया सवाल भी उठ खड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि यदि तहबाजारी व्यवस्था पूरी तरह नियमों के अनुरूप और वैध तरीके से संचालित हो रही है, तो फिर कथित तौर पर अलग-अलग स्तर पर मैनेजमेंट किए जाने की चचार्एं आखिर क्यों हो रही हैं? यदि ये चचार्एं निराधार हैं तो उन्हें तथ्यों के साथ खारिज किया जाना चाहिए, लेकिन यदि इनमें जरा भी सच्चाई है तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि नैतिक जवाबदेही का भी गंभीर विषय बन सकता है।
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि विरोध के स्वरों को शांत करने, शिकायतों को कमजोर करने अथवा माहौल को प्रभावित करने के प्रयास किए जाने की चचार्एं हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि भविष्य की जांच में ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक होगा कि क्या यह तहबाजारी व्यवस्था में संभावित कमियों को छिपाने का प्रयास था या फिर इसके पीछे कोई अन्य सुनियोजित रणनीति अथवा कथित कूटरचित षड्यंत्र कार्य कर रहा था।
पूरे घटनाक्रम में एक तथाकथित “सलाहकार” की भूमिका भी चचार्ओं का विषय बनी हुई है। आरोप है कि वह व्यवस्था से जुड़े विवादों को सुलझाने के बजाय उन्हें नियंत्रित करने अथवा विरोध के स्वर को प्रभावित करने की कोशिश में सक्रिय रहा। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है”!
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, 1 अगस्त को बांदा के एक होटल में तहबाजारी व्यवस्था से जुड़े एक पक्ष के समर्थन में माहौल तैयार करने को लेकर एक बैठक आयोजित होने की चर्चा है। आरोप हैं कि इस बैठक के दौरान कुछ पत्रकारों को पंद्रह अगस्त के अखबारी मौसम के बीच कथित रूप से “रेवड़ी” बांटे जाने जैसी गतिविधियां हुईं। वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक में जिस उद्देश्य से पत्रकार वहां पहुंचे वहां एकदम उलट फुलट मिला बल्कि वहां मौजूद एक व्यक्ति द्वारा कुछ पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का विस्तृत पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में इन आरोपों की सत्यता केवल निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
उठ रहे हैं कई अहम सवाल
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि निर्धारित सीमा और तय दरों से अलग वसूली की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं तो संबंधित विभागों द्वारा अब तक प्रभावी जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यदि व्यवस्था पूरी तरह वैध और पारदर्शी है तो कथित “मैनेजमेंट” की चचार्ओं की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? क्या यह केवल अफवाह है, तहबाजारी व्यवस्था में संभावित कमियों को छिपाने का प्रयास है, अथवा इसके पीछे कोई अन्य रणनीति काम कर रही है? इन सभी सवालों के उत्तर फिलहाल जांच के दायरे में हैं।
निष्पक्ष जांच ही बताएगी सच्चाई
जनहित से जुड़े इस पूरे प्रकरण में आवश्यक है कि जिला प्रशासन और जिला पंचायत तहबाजारी अनुबंध की शर्तों, वसूली रजिस्टर, राजस्व अभिलेख, संबंधित होटल के सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, अवैध वसूली, दबाव बनाने या अन्य अनुचित गतिविधियों की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि सभी आरोप निराधार सिद्ध होते हैं तो उसे भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि जनता के बीच फैले संशय का अंत हो सके।
फिलहाल तहबाजारी व्यवस्था को लेकर उठे सवाल प्रशासनिक कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही को बहस के केंद्र में ले आए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कब और क्या निष्कर्ष सामने लाती हैं। आने वाला समय ही बताएगा कि यह पूरा मामला केवल चचार्ओं तक सीमित था या फिर इसके पीछे वास्तव में कोई अनियमितता, कमियों को छिपाने का प्रयास अथवा कोई अन्य कथित षड्यंत्र मौजूद था।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *