मरीज बेहाल!स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाकियू भानू का हल्ला बोल, आंदोलन की चेतावनी
पीलीभीत। सीएमओ डॉक्टर आलोक शर्मा के स्थानांतरण के बाद पीलीभीत जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बीमार हो गई है। नए सीएमओ के फोन न उठाने से अवस्थाएं हाबी हैं। पूरनपुर समेत जिले भर में मानकों को ताकपर रखकर फर्जी अस्पताल और क्लीनिक की बाढ़ आ गई है। जनपद की स्वास्थ्य सेवा लेकर भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मोर्चा खोल दिया है। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सीएमओ न तो किसान नेताओं के फोन उठाते हैं और न ही स्थानीय पत्रकारों के कॉल का जवाब देते हैं, जिससे आम जनता की समस्याओं का समाधान प्रभावित हो रहा है।भाकियू (भानू) के मंडल अध्यक्ष लालू मिश्रा और जिला मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र गुप्ता ने कहा कि कई बार सीएमओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। कभी बैठक में व्यस्त होने की बात कही जाती है, लेकिन बैठक समाप्त होने के बाद भी शिकायतकतार्ओं को वापस कॉल कर उनकी समस्या जानने की कोई पहल नहीं की जाती। उनका कहना है कि शासन लगातार अधिकारियों को जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने और जनता की शिकायतें सुनने के निर्देश देता है, ऐसे में जिले के स्वास्थ्य विभाग के सर्वोच्च अधिकारी का फोन पर उपलब्ध न होना गंभीर चिंता का विषय है।किसान नेताओं ने जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि अस्पताल में कई स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कई वार्डों और प्रतीक्षालयों में पंखे ठीक से संचालित नहीं हो रहे हैं, जिससे उमस भरे मौसम में मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावे केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।भाकियू (भानू) पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार कराया जाए और अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हुआ और सीएमओ की कार्यशैली में बदलाव नहीं आया तो जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की शिकायत की जाएगी। इसके बावजूद भी कार्रवाई नहीं होने पर संगठन धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले हालात की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

