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मध्य प्रदेश में मतांतरण के एंगल से होगी बिशप के यहां से मिले दस्तावेजों की जांच

Friday, September 9, 2022

/ by Today Warta



मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए तीन बिंदुओं पर जांच के आदेश। लीज के सात करोड़ रुपये नहीं चुकाए

भोपाल । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को जबलपुर स्थित द बोर्ड आफ एजुकेशन चर्च आफ नार्थ इंडिया के बिशप पीसी सिंह के निवास से मिले दस्तावेजों की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस राशि का उपयोग मतांतरण या गैरकानूनी कार्य में तो नहीं हो रहा था, ऐसे तीन बिंदुओं पर जांच करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री शुक्रवार को ईओडब्ल्यू की समीक्षा कर रहे थे।

ईओडब्ल्यू को ट्रस्ट के कार्यों में धांधली की शिकायत विनटेबल फादर हीरा नवल मसीह नागपुर द्वारा की गई थी। मसीह की शिकायत पर जब ईओडब्ल्यू ने गुरुवार को जबलपुर में कार्रवाई की, तब चेयरमैन पीसी सिंह के खिलाफ ट्रस्ट की संस्थाओं का दुरूपयोग, नाम परिवर्तित कर नई संस्थाओं का निर्माण, नई संस्थाओं के नाम से अवैधानिक कार्य, स्कूली संस्थाओं की फीस में गड़बड़ी, निजी कार्यों में ट्रस्ट के पैसों का दुरुपयोग करने जैसे कागज सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त ट्रस्ट संस्थाओं की लीज के नवीनीकरण में धोखाधड़ी, उनका सात करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स न चुकाया जाने जैसे प्रकरण सामने आए हैं। छापे में 17 संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज, 48 बैंक खाते, एक करोड़ 65 लाख रुपये से अधिक नकद राशि, 18 हजार 352 यूएस डालर, 118 पाउंड सहित आठ चार पहिया वाहन बरामद हुए हैं।

बड़े स्तर पर सामने आई है धोखाधड़ी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शासन इस समूची छापेमारी को गंभीरता से ले रहा है। हम तीन स्तर पर जांच करने जा रहे हैं। पहली- इस पूरी छापेमारी में प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त धन का उपयोग मतांतरण, अवैधानिक कार्य या गैरकानूनी कार्यों में तो नहीं हो रहा है। दूसरा- शासन द्वारा ट्रस्ट की संस्थाओं को जो जमीन लीज पर दी गई है, उसका उपयोग स्कूल, अस्पताल या धर्मार्थ के कार्यों में न होकर अन्य व्यवसायिक कार्यों में तो नहीं हो रहा है। तीसरा- कई ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिसमें ट्रस्ट की संस्थाओं के लीज संबंधी प्रकरण में धोखाधड़ी कर टैक्स नहीं चुकाया गया है या नाम परिवर्तित कर दुरुपयोग हो रहा है। लीज नवीनीकरण में स्टांप ड्यूटी की धांधली संबंधी शिकायतों की जांच इओडब्ल्यू और जिला प्रशासन करेंगे। इस प्रकरण एवं छापेमारी में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन पर नियमानुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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