चित्रकूट मंडल में पर्यटन विकास को मिलेगी नई गति, 84 करोड़ की 27 परियोजनाओं की मंत्री ने की समीक्षा

Suresh Pal
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आत्माराम त्रिपाठी

बांदा: भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट सहित पूरे चित्रकूट मंडल को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों की रफ्तार तेज कर दी है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत पर्यटन विकास से जुड़ी करीब 84 करोड़ रुपये की 27 परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
समीक्षा बैठक में चित्रकूट की 15, बांदा की छह, हमीरपुर की तीन तथा महोबा की तीन पर्यटन परियोजनाओं की प्रगति पर विचार किया गया। मंत्री ने कहा कि पर्यटन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं, बल्कि प्रत्येक स्थल की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने एक करोड़ रुपये तक की सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं को नवंबर तक हर हाल में पूरा कराने के निर्देश दिए। साथ ही जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय, नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता पर विशेष जोर देने को कहा।
चित्रकूट में प्रयागराज, बांदा और कौशांबी मार्ग पर थीम आधारित तीन भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इसके अलावा बेरी पुलिया से शंख चौक तक पर्यटन विकास कार्य, रामघाट पर कथा स्थल, तुलसी घाट पर आरती स्थल, प्राणु बाबा आश्रम, मानिकपुर स्थित लैना बाबा मंदिर और मारी माता मंदिर के विकास के साथ बोड़ी पोखरी में हाईमास्ट लाइट एवं सौंदर्यीकरण के कार्य भी प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से चित्रकूट को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
बैठक में करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित ‘परंपरा’ वन स्टॉप सेंटर फॉर टूरिज्म एंड कल्चर परियोजना की भी समीक्षा की गई। यह केंद्र चित्रकूट की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को एक ही स्थान पर प्रस्तुत करेगा तथा पर्यटकों को पर्यटन संबंधी जानकारी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
बांदा जिले में तिंदवारी स्थित खासी बाबा मंदिर एवं हनुमान मंदिर, नरैनी के प्राचीन बीरगढ़ माता मंदिर तथा श्री राम जानकी मंदिर में इंटरप्रिटेशन सेंटर की स्थापना समेत अन्य विकास कार्यों पर चर्चा हुई। महोबा में कालेश्वर मंदिर, गोरैया माता मंदिर और ऐतिहासिक मस्तानी महल के संरक्षण एवं विकास की समीक्षा की गई, जबकि हमीरपुर में काली मंदिर, राठ स्थित महेश्वरी माता मंदिर और मां महाकाली सिद्धपीठ सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास एवं पर्यटक सुविधाओं के विस्तार पर मंथन हुआ।
बैठक में संस्कृति विभाग की ओर से चित्रकूट के रामलीला परिसर के सौंदर्यीकरण, राम जानकी मंदिर स्थित रामलीला मंच के विकास तथा सोमनाथ मंदिर, खाकरा मठ, शांतिनाथ मंदिर, योगिनी माता मंदिर और महोबा के एक प्राचीन मंदिर के संरक्षण संबंधी प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। वहीं धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से चित्रकूट स्थित बड़ी भवानी मंदिर के अनुरक्षण कार्यों की प्रगति तथा महोबा के इमिलिया डांग गांव स्थित प्राचीन मंदिर, गुमान बिहारी मंदिर और वासुदेव मंदिर के संरक्षण एवं विकास संबंधी प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान स्वीकृत निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को नियमित स्थलीय निरीक्षण, सतत निगरानी और सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा में उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा करने के निर्देश दिए।

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