कटनी। जिले के चप्पे चप्पे में सैकड़ों साल पहले पत्थरों में उकेरी गई कलात्मक विरासत में कितनी माइनिंग के वैध अवैध करोबार में नष्ट हुई , कितनी मुर्ति तस्कर ले गए , कितनी यहां वहां होने वाले निर्माण कार्यों में खप गई तथा कितनी जानकारी के अभाव में लोगों से नष्ट हो गई, यह शोध का विषय हो सकता है । किंतु आज भी क्षेत्र में विपुल पुरा सम्पदा सुरक्षित है जिसे देखने - सहेजने का कार्य समाज को करना चाहिये । तेरह नवम्बर को ग्रामीण क्षेत्र में सड़क किनारे मन्दिर के चबूतरे पर उपेक्षित पड़ी छोटी सी प्रतिमा दिखी । जो इस क्षेत्र के प्रचलित शिल्प से सर्वथा अलग एवं अनूठी लगी । सरकारी बजट का पैसा जहां ये कला है वहां नहीं खर्च होता । वरन वहां खर्च होता है जहां अधिकारी ए सी कमरों में बैठते और रहते हैं । बिलहरी , तिगवाँ ( बहोरीबंद) , कारीतलाई और बडगाँव में इस सम्पदा का पहाड लगा है । यह घोर विडम्बना है ।

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