जबलपुर। नगर निगम में कार्यरत ठेका कंपनी की ओर से कर्मचारियों की पीएफ राशि उनके खातों में जमा नहीं किए जाने की वजह से मुख्य नियोक्ता नगर निगम के विरुद्ध कार्रवाई की गई। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर नगर निगम का बैंक खाता सीज कर लिया गया। इस खाते को तभी फिर स्वतंत्र किया गया, जब ईपीएफओ ने उससे एक करोड़ पैंसठ लाख रुपये जमा करवा लिए। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त राकेश सहरावत का कहना है कि भविष्य निधि की बकाया राशि को नियोक्ताओं से वसूले जाने के लिए विशेष अभियान मार्च 2023 तक जारी रहेगा। ईपीएफओ-आयुक्त राकेश सहरावत ने बताया कि नगर निगम द्वारा नियोजित चार कंपनियों द्वारा पीएफ की राशि जमा कराए जाने में लापरवाही की गई थी। इन कंपनियों के नाम मां रेवा श्रमिक सफाई कामगार सहकारी समिति मर्यादित, गंगा सफाई श्रमिक कल्याण समिति, संस्कारधानी सफाई कामगार सहकारी समिति मर्यादित और सुलभ सेवा आर्गेनाइजेशन शामिल हैं। इन कंपनियों के विरूद्ध कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 के उल्लंघन का प्रकरण बनाया गया।
3.31 करोड़ का निर्धारण
निगम की कंपनियों पर ईपीएफ एक्ट की धारा 7क के तहत कार्रवाई की गई। 19 नवंबर 2018 को आदेश जारी कर उन पर 3 करोड़ 31 लाख 98 हजार 854 रुपये का बकाया निर्धारण आदेश जारी किया गया। संबंधित ठेका कंपनियों एवं इनके मुख्य नियोक्ता जबलपुर नगर निगम को उक्त राशि जमा किए जाने के लिए कहा गया था।
सीजीआइटी कोर्ट चले गए नियोक्ता
ईपीएफओ के उक्त आदेश के विरुद्ध उपरोक्त चारों संस्थान द्वारा केन्द्र सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (सीजीआइटी कोर्ट) में चले गए। 14 फरवरी 2019 को अंतरिम आदेश जारी कर कुल बकाया का 50 प्रतिशत जमा किए जाने के आदेश दिए गए। इसके बाद भी मामले की सुनवाई जारी रखी गई।
सीजीआइटी कोर्ट ने सुनाया फैसला
सीजीआइटी द्वारा 19 अक्टूबर 2022 को क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त के पक्ष में आदेश जारी कर शेष राशि जमा करने के आदेश जारी किए गए। वसूली अधिकारी कांता मोटवानी द्वारा एक करोड़ पैंसठ लाख की बकाया राशि वसूलने मुख्य नियोक्ता नगर निगम के बैंक खाते को सीज कर दिया। शाम होते-होते निगम प्रशासन की ओर से बकाया राशि जमा करवा कर अपना खाता फ्री-होल्ड कराया।

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