तप करने से होते भव से पार
ललितपुर। दुर्गाजी मन्दिर तेरा में चल रही श्रीमद भागवत कथा के आज चतुर्थ दिवस की कथा में कथा व्यास देवी पूजाजी के मुखारविंद से धु्रव चरित्र सुनाया गया। उन्होंने कहा कि मनुजी के दो पुत्र हुए एक तो प्रियव्रत और एक उत्तानपाद जी हुए। महाराज प्रियव्रत जी महाराज नाराजी से उपदेश लेकर भजन करने के लिए चले गए। उत्तानपाद जी महाराज की दो पत्नियां थी। एक तो सुनीति एक सूची थी। सुनीति मैया के ध्रुव जी महाराज हुए। ध्रुव महाराज ने 6 वर्ष की अवस्था में अपनी सौतेली माँ के कहने पर भगवान को पाने के लिए जंगल में जाकर घोर तपस्या किया। नारद जी ने ध्रुव महाराज को समझाया कि यह अबस्था तुम्हारी खेलने कूदने की है।इतना तप करना ठीक नही। नारद जी ने देव जी महाराज को मंत्र दिया। उस मंत्र को देने के बाद जब ध्रुव जी महाराज ने भगवान का ध्यान किया। तब जाकर भगवान ने ध्रुव जी महाराज को दर्शन दिये।ओर उनका पूरे संसार मे अटल पदवी देकर आशीर्वाद दिया।जो भी मनुष्य प्रेम से भगवान का भजन करता है।उनका ध्यान भगवान हमेशा रखते है।कथा व्यास पूजा देवी के साथ संगीत पर राजपाल सिंह राजपूत,दशरथ सिंह राजपूत,धर्मेन्द्र प्रजापति,रमलचंद प्रजापति,अनुराग नामदेव आदि सहयोग कर रहे है।श्रीमद भागवत कथा का समापन 3 सितंबर को किया जाएगा।अत: क्षेत्रीय जनता से अनुरोध है कि दिन में अपरान्ह 11 से 2 बजे तक एवम रात्रि 7 बजे से हरी इच्छा तक कथा सुनकर अपने आप को कृतार्थ करे। इस अवसर पर कथा परीक्षत संजय देवेन्द्र सिंह लम्बरदार, भगवत सिंह बैस, कृपाल सिंह, रघुवीर सिंह, हनुमत सिंह, सुखपाल सिंह, प्रहलाद सिंह, शैलेन्द्र सिंह, भुजबल सिंह, राकेश सिंह, पहलवान सिंह, रमेश सिंह, सुरेन्द्र पाल सिंह गोर, श्रीपत हरिकृष्ण यादव, मनोहर सिंह, राजपाल सिंह, मनीराम, कुंजीलाल विश्वकर्मा, जमना प्रसाद, जानकी प्रसाद, रामकिशन नामदेव, शिमले, मनु, मूलचन्द, जालम कुशवाहा, श्रीपत, राहुल देव, चन्द्रभान, भगीरथ, किशन पाल, सुन्ना लाल, रामस्वरूप रजक, बिन्दे अहिरवार प्रधान, कोमलचन्द, विनोद, तुलाई, जयराम, निरन आदि समस्त ग्रामवासियों का सहयोग मिल रहा है।

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