गांधीनगर प्रथम में श्रीमद भागवत कथा सुनने को उमड़ रहे श्रोता
ललितपुर। शहर के गांधीनगर प्रथम पुरानी पुलिस चौकी के पास में चल रही पावन श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन सभी ने भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव उत्साह और उमंग के साथ मनाया। कथा व्यास पं. सौम्यानंद महाराज द्वारा नंद बाबा के घर पर उत्सव के माहौल का सुंदर वर्णन करने के साथ आयोजन स्थल का पूरा माहौल भी नंदोत्सव के रंग में पूरी तरह से रंग गया। कथा के पूर्व यजमान अशोक भार्गव, रामेश्वर पटेरिया, इं संजय चौबे सहित अनेकों लोगों ने व्यासपीठ का पूजन किया। नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल के उद्घोष के साथ समूचा आयोजन परिसर गूंज उठा. कृष्ण का रुप धरे शिवांशु मिश्र, नंद बाबा बने रज्जन पटेरिया के साथ द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद मानो फिर से गांधी नगर (प्रथम) वार्ड में जीवंत कर दिया। भक्तों ने भजनों की धुनों पर मगन होकर से थिरकते हुए श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद उजागर किया। बासुदेवजी के रुप में राधे गोस्वामी, वामन अवतार के रुप में आरू तिवारी खूब जमे. श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव का आनंद मनाते हुए भक्तों के बीच खूब मिठाई, टॉफीयां और बधाईयां बांटी गयी. कथा प्रसंग में कथा व्यास पं.सौम्यानंद महाराज ने कहा कि भगवान युगों-युगों से भक्तों के साथ अपने स्नेह रिश्ते को निभाने के लिए अवतार लेते आये हैं। व्यासजी ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के भाव और प्रेम से बंधे है। उनसे भक्तों की दुविधा कभी देखी ही नहीं जाती। वे अपने भक्तों की कामना की पूर्ति तो करते ही है। साथ ही उनके साथ अपने स्नेह बंधन निभाने खुद इस धरा पर आते हैं। अब तक विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों कथाएं कर चुके पं. सौम्यानंद व्यास ने आज की कथा के दौरान वामन अवतार, समुंद्र मंथन, श्रीराम जन्मोत्सव और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का सुंदर और भाव पूर्ण वर्णन किया। महाराजश्री ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के साथ सदा हर पल खड़े रहते हैं. वे भक्तों के हाथों से दी प्रेम और भाव के साथ दी गई वास्तु उसी तरह ग्रहण करते हैं, जिस तरह से उन्होंने द्रौपदी का पत्र और गजेंद्र का पुष्प ग्रहण किया। भगवान ने काल रुपी मकर से भक्त गजराज की रक्षा की तो द्रौपदी के पुकार पर उसका संकट मिटाने स्वयं दौड़े चले आये। यह सारी कथाएं ये प्रमाणित करती हैं कि भक्तों के भाव से सदा बंधे रहनेवाले भगवान भक्तों के साथ अपना स्नेह निभाने खुद आते हैं. ठाकुरजी सिर्फ यह कभी नहीं चाहते कि उसके भक्त के पास अहंकार रहे. ठाकुरजी अपने भक्त से ये भी कहते हैं कि मुझे, वो वस्तु अर्पित कर, जो मैंने तुझे कभी नहीं दी. ठाकुरजी कहते हैं- ऐसी कोई वस्तु जो मैंने तूझे नहीं दी, वह अहंकार है. यह मैंने तूझे नहीं दिया. बल्कि तूने खुद इसे अपने भीतर तैयार किया है। कथा व्यास श्री सौम्यानंद जी महाराज जी ने कहा भगवान को अगर पाना है तो मन में इस भाव को बसा लेना होगा कि मेरा सब कुछ मेरे ठाकुरजी है. मेरे पास अपना कुछ भी नहीं जो कुछ भी है सो मेरे ठाकुर जी का ही है. गजेंद्र मोक्ष पाठ की महिमा बताते हुए कथा व्यास श्री सौम्यानंद जी महाराज ने कहा कि जो भी यह पाठ करता है. उस पर ठाकुरजी की कृपा सदा बनी रहती है. संकट उस पर सपने में भी नहीं आते. माता-पिता के चरण पकड़ लो, किसी और की चरण वंदना की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी. आचार्य श्री सौम्यानंद जी महाराज ने कहा कि जीवन में सब कुछ जरूरी है पर एक मर्यादा के अंदर सभी हो तो तभी तक सब ठीक है। कथा व्यास आचार्य श्री सौम्यानन्द महाराज जी ने समुंद्र मंथन से जुड़ी कई रोचक कथाएं सुनाईं. उन्होंने कहा कि अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है. ठीक उसी प्रकार जैसे अहंकार से ग्रसित दानवों ने समुंद्र मंथन के समय बासुकी नाग के मुख को पकडऩा श्रेयस्कर समझा और भगवान के मोहिनी रूप पर मंत्र मुग्ध हो उठे.
भगवान के वामन अवतार को तीन कदम आश्रय स्थली दान में देने के बाद राजा बलि को पाताल लोक की शरण लेनी पड़ी. इसलिए कुछ भी करो, सोच समझ कर करो, जो कुछ भी तोल-मोल कर बोलो. मीठा और मधुर बोलो. आज कथा के उपरांत यजमान अशोक भार्गव, रामेश्वर पटेरिया, इं संजय चौबे सहित अनेकों लोगों ने व्यासपीठ का पूजन किया और भागवत भगवान की आरती उतारी। सोमवार को कथा स्थल पर सैकड़ों श्रद्धालु उमडे। वहीं भक्ति गीतों पर महिलाएं एवं पुरूष नृत्य करते रहे। कार्यक्रम में भावना गोश्वामी, राजकुमार जैन, नीतेश संज्ञा,चंद्रशेखर पंथ, श्रीकांत कुशवाहा का भागवत कथा में व्यास पीठ से सम्मान किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में आयोजक महिला मंडल से काशीबाई गोस्वामी, सुषमा पटेरिया, रंजना भार्गव, राजकुमारी चौबे सहित खुशी लाल लोधी एड. ब्रह्मानंद चौबे, दीपक गोस्वामी, बालकृष्ण तिवारी, रज्जन पटेरिया, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, ओमप्रकाश झा, सत्यप्रकाश तिवारी, कुंजीलाल रजक आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद बबेले ने किया।

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