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संविधान दिवस पर नेमवि में संगोष्ठी सम्पन्न

Sunday, November 27, 2022

/ by Today Warta



इन्द्रपाल सिंह प्रिइन्द्र

संविधान की प्रस्ताव ही संविधान की आत्मा: प्रो. द्विवेदी

ललितपुर। संविधान दिवस के अवसर पर नेहरू महाविद्यालय में प्राचार्य प्रो.राकेश नारायण द्विवेदी की अध्यक्षता में संगोष्ठी का आयोजन तुलसी सभागार में किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्राचार्य प्रो.राकेश नारायण द्विवेदी द्वारा संविधान के शिल्पकार डा.भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण किया गया तथा अतिथियों द्वारा पुष्प अर्पित किए गए एवं छात्र-छात्राओं को संविधान दिवस के अवसर पर संविधान की शपथ दिलायी गयी। इस अवसर पर संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्राचार्य ने कहा कि भारत का संविधान उच्च कोटि का है जिसमें देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना ही संविधान की आत्मा है। क्योंकि संविधान को समझने के लिए सबसे पहले संविधान की प्रस्तावना को समझना होगा, संविधान की प्रस्तावना ही संविधान की आधारशिला है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो.पंकज शर्मा ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना के पंथ निरपेक्ष और गणराज्य शब्द की व्याख्या करते हुए अवगत कराया कि सरकार का कोई धर्म विशेष नहीं होता है। गणराज्य शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि भारत में राजतंत्रामक व्यवस्था नहीं है, अर्थात राजा का पुत्र ही राजा नहीं होगा। भारत की जनता जिसको चाहेगी उसे चुनकर सरकार का प्रमुख बनायेगी। विषय प्रवर्तन करते हुए असि. प्रोफेसर राजनीति विज्ञान डा. रजनी चौबे ने कहा कि भारत का संविधान आंशिक रूप से दिनाँक 26 नवम्बर 194 को लागू हुआ और पूर्ण रूप से 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डा.ओ.पी.चौधरी ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संविधान है जिसको तैयार होने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन लगे। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का संविधान लागू करने वाले की मंशा पर निर्भर करता है कि वह कितना अच्छा और प्रभावी होगा। कार्यक्रम के संयोजक हिंदी विभाग के प्राध्यापक हिमांशधर द्विवेदी ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिकों संविधान को अच्छी तरह जानना चाहिए, क्योंकि बिना संविधान के ज्ञान के वह अपने अपने अधिकारों को सुरक्षित नहीं रख पायेगा। हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डा.सुधाकर उपाध्याय ने कहा कि भारतीय संविधान भारत के लोगों के अधिकार और कर्तव्यों का जीवंत दस्तावेज है। हिन्दी प्राध्यापक जितेन्द्र कुमार ने कहा कि मानव के सर्वांगीण विकास के लिए संविधान द्वारा दिये गये समानता के अधिकार, अत्यन्त आवश्यक है। इन अधिकारों के अभाव में किसी व्यक्ति की बहुमुखी प्रतिभा का विकास होना असंभव है। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया। इस अवसर पर डा.संजीव कुमार शर्मा, डा. बलराम द्विवेदी, डा. राजेश तिवारी, डा.सूबेदार यादव, फहीम बख्श, अंकित चौबे, हरदयाल, भरत, अनिल, राकेश, कामता, चुन्नीलाल एवं समस्त छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे। संचालन डा.ओ.पी. चौधरी ने किया एवं सुधाकर उपाध्याय ने किया।

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