विमल सिंह
बांदा। जिले की कमान संभाल कर जिला अधिकारी अनुराग पटेल ने लम्बी पारी खेली। इस दौरान नदियों व तालाबों को पुनर्जीवित करने का संकल्प लेकर यूपी रत्न का अवार्ड हासिल किया। 1 साल 50 दिन में जिले में रहकर एक अलग छाप छोड़ी और लोगों के दिल में जगह बनाई। उनके स्थानांतरण के बाद जिले की कमान श्रीमती दीपा रंजन को मिली है। वह जिला अधिकारी के रूप में दूसरी महिला जिलाधिकारी होंगी। आईएएस दीपा रंजन बिहार की रहने वाली थीं। उन्होंने बीए (ऑनर्स) भूगोल में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा के लिए कोचिंग ज्वाइन की और अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास की। दीपा रंजन को 52वीं रैंक मिली। यूपीएससी की परीक्षा पास करना उनके लिए आसान नहीं था। क्योंकि जब वह बहुत छोटी थी।, तभी से उन्होंने अपने पिता को खो दिया था। तभी से उनके परिवार का सपोर्ट सिस्टम उनके चाचा ही थे। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें अपने पारिवारिक मुद्दों का भी प्रबंधन करना पड़ा। उन्हे खुद पर भरोसा था कि वह यूपीएससी की परीक्षा पास कर लेगी इसलिए उसने अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। वह 2013 बैच की हैं। उन्हें पहले दीपा अग्रवाल नाम से जाना जाता था लेकिन उन्होंने 2016 में अपना नाम बदलकर दीपा रंजन कर लिया।श्रीमती रंजन ने मसूरी से ट्रेनिंग कर अयोध्या में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हापुड में चीफ डेवलपमेंट आफिसर लखनऊ में एडिशनल हाउसिंग कमिश्नर व बदायूं में जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया है। उनका जिला अधिकारी के रूप में कार्य करने का अनुभव करीब एक साल नौ माह का ही है। 2013 बैच की आई ए एस श्रीमती दीपा रंजन बांदा की दूसरी महिला जिला अधिकारी होंगी। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी अनुराग पटेल को प्रतीक्षारत रखा गया है।

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