राकेश केसरी
कौशाम्बी। धरती के भगवान माने जाने वाले डॉक्टर निजी स्वार्थ के लिए मरीजों की जान से खेलने में लगे हैं। जिला अस्पताल के डाक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए गरीब मरीजों के इलाज से खिलवाड़ चल रहें है। अधिकांश डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस में व्यस्त हैं, वे कुछ घंटे के लिए आते हैं। डॉक्टरों की ड्यूटी सुबह आठ से शाम चार बजे तक आठ घंटे की है, मगर वे दो से तीन घंटे ही आ रहे हैं। मरीजों की जांच से लेकर दवाएं देने का काम फार्मासिस्ट ही कर रहे हैं। कुछ डॉक्टरों के पास तो अपने अंडर में भर्ती मरीजों का व्योरा तक नहीं होता है। जबकि जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों ने प्राइवेट प्रैक्टिस न करने का शपथ पत्र दिया है। इसके बाद भी वे प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। यहां तक कि जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को अपने निजी क्लीनिक और हॉस्पिटल में डॉक्टरों से रेफर करा रहे हैं। प्राइवेट प्रैक्टिस का चस्का जिला अस्पताल के डॉक्टरों को भी लग गया है। उन्हें 30 से 40 हजार रुपये तक दिए जा रहे हैं। ऐसे में वे अस्पताल में खानापूर्ति के लिए आ रहे हैं, जबकि मरीजों के इलाज के लिए जूनियर डॉक्टरों को 70 से 80 हजार रुपये तनख्वाह के रुप में मिलता है। जबकि जिलें कई सीएचसी व पीएचसी दर्जनों कर्मचारी कई महीनों से काम पर नहीं आ रहे हैं। इसके बाद भी उनकी उपस्थित दर्ज हो रही है और वेतन जारी किया जा रहा है।

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