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प्रदेश में अब तक बिना परमिट चल रहे कितने आटो जब्त किए, मप्र हाई कोर्ट ने एक हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने दिए निर्देश

Friday, November 18, 2022

/ by Today Warta



जबलपुर। हाई कोर्ट ने जबलपुर सहित समूचे प्रदेश में धमाचौकड़ी मचा रहे आटो की समस्या को बेहद गंभीरता से लिया। इसी के साथ राज्य शासन से पूछ लिया कि प्रदेश भर में अब तक कितने ऐसे आटो को जब्त किया गया, जो बिना परमिट के संचालित हैं। इस सिलसिले में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 25 नवंबर को तय की गई है। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष यह मामला गुरुवार को सुनवाई के लिए लगा। इस दौरान राज्य शासन की ओर से पूर्व निर्देश के पालन में रिपोर्ट पेश की गई। हाई कोर्ट ने इस रिपोर्ट को रिकार्ड पर लेने के साथ असंतोष जताया। बिना परमिट आटो तुरंत जब्त करने व चालक को गिरफ्तार करने के अभिवचन का क्या हुआ : इस मामले की सुनवाई के दौरान यह जमीनी सच्चाई रेखांकित की गई कि बिना परमिट के चल रहे हजारों आटो को मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। हाई कोर्ट ने पाया कि 30 सितंबर, 2019 को राज्य शासन ने अभिवचन दिया था कि बिना परमिट चल रहे आटो को तुरंत जब्त कर छोड़ा नहीं जाएगा। यही नहीं ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया जाएगा। लेकिन रिपोर्ट में इस सिलसिले में कोई ठोस जानकारी नदारद रही।

पूर्व रिपोर्ट्स का सारांश भी नहीं पेश हुआ :

विगत सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिए थे कि नियम विरुद्ध आटो संचालन पर अंकुश लगाने ठोस कार्य योजना पेश करें। इसके साथ ही पूर्व में दिए गए निर्देशों के पालन में जो पालन प्रतिवेदन पेश किए गए हैं, उनका सारांश भी प्रस्तुत करने कहा था। लेकिन यह नजर नहीं आया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में जबलपुर निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा ने शहर के साथ प्रदेश भर में बेलगाम और नियम विरुद्ध आटो संचालन को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। बाद के वर्षों में इसी मुद्दे को लेकर कुछ अन्य याचिकाएं भी संलग्न हुईं। पूर्व में हाई कोर्ट ने कई बार दिशा निर्देश जारी किए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सतीश वर्मा ने कहा कि सरकार कागजी रिपोर्ट पेश कर गुमराह कर रही है उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क पर वास्तविक स्थिति कुछ है। आटो चालक ओवर लोडिंग के समेत सारे नियम तोड़ रहे हैं। आटो में ड्राइवर सीट पर चार सवारी और पीछे 15 सवारी तक बैठा कर ले जा रहे हैं, जबकि एक बार में महज तीन सवारी ले जाने का ही नियम है।

लागू नहीं हो रहा सेंट्रल एक्ट :

बहस के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता सतीश वर्मा ने दलील दी कि वोट बैंक की राजनीति के चलते केन्द्र सरकार के मोटर व्हीकल संशोधन नियम 2019 मध्य प्रदेश में लागू नहीं किए जा रहे हैं। इस नियम से पूरे प्रदेश में ट्रैफिक और यातायात में सुधार लाया जा सकता है। इसमें भारी जुर्माने का प्रावधान भी है। पूर्व में सरकार ने कोर्ट में वादा किया था कि प्रदेश में सेंट्रल मोटर वीकल एक्ट 2019 लागू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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