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झिंझरी पहाडी की छज्जेदार चट्टाने आम चट्टानों से अलग एवं अनूठी

Friday, November 18, 2022

/ by Today Warta



कटनी। कलेक्टरेट के बगल में स्थित झिंझरि की पहाडियों का छतरी नुमा स्वरुप सामान्य चट्टानों से सर्वथा अनूठा है । यहां की चट्टानें अपने छज्जेदार ( छतरीदार ) रुप के कारण अन्य कहीं की चट्टानों से बिलकुल अलग हैं । प्रागैतिहासिक- ऐतिहासिक काल में मनुष्य अपना निवास एवं कुछ समय का विश्राम इन छज्जेदार चट्टानों के नीचे करता रहा है । यही कारण रहा कि उस काल के मानव नें यहां की चट्टानों में तरह तरह के चित्र उकेरे हैं जो हजारों साल बाद आज भी दिखते हैं । किंतु दुखद कि हमारा संस्कृति विभाग आज तक न झिंझरी के शैल चित्रों को सहेज सका न यहां की छज्जेदार पहाडियों को । लगभग 25 - 30 वर्षों तक कटायेघाट - झिंझरी की पहाडियों में गिट्टी बोल्डर की तुडाई होती रही जिससे बहुत सी चट्टानें और शैल चित्र नष्ट हो गए । और जब कटनी जिला बना तो इसी पहाडी पर नवीन कलेक्टरेट भवन बनाना प्रस्तावित किया गया । जिसके निर्माण में एक बार फिर पहाडियों का विध्वंस शुरु हुआ । वह तो वन विभाग के तत्कालीन डी एफ ओ श्री चितरंजन त्यागी साहब की कलात्मक द्रष्टि थी जो उन्होने वन विभाग को मिली जमीन की चट्टानों में शैल चित्रों को न केवल पहचाना बल्कि उन्हे सहेजा भी । त्यागी साहब नें शैल चित्र वाली पहाडियों की फैंसींग कराकर उसे चितरंजन शैल वन का नाम दिया । उनकी योजना इस स्थल को  एक पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने की थी । जब तक वे थे , बहुत कुछ ठीक था । किंतु उनके स्थानांतरण के बाद फिर वही ढाक के तीन पात शैली में यहां वीरानी छा गई है । आवश्यक है झिंझरी शैल वन को संरक्षित घोषित कर इसे आकर्षक पर्यटन स्थल के रुप में आम जन के लिए उपलब्ध कराया जाये । और हजारों साल पहले बनाए गए शैल चित्रों को नष्ट होने से बचाया जाये । 

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