इन्द्रपाल सिंह प्रिइन्द्र
आचार्य युवा पीढ़ी में करें संस्कारों का सृजन : प्रदीप चौबे
ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय ललितपुर के संस्कृत सभागार में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आई.क्यू.ए.सी.) के तत्त्वाधान में प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्रबन्धक प्रदीप चौबे, प्राचार्य राकेश नारायण द्विवेदी एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. ओमप्रकाश शास्त्री ने दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती पूजन करके किया।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए प्रबंधक प्रदीप चौबे ने कहा कि महाविद्यालयों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ छात्र/छात्राओं को नीति, आचार एवं संस्कारों की शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत देश में वर्तमान समय युवा पीढ़ी में संस्कारों का क्षरण हो रहा है। अत: आचार्यों एवं शिक्षकों का दायित्व है कि निर्धारित पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों में श्रेष्ठतम संस्कारों का सृजन अवश्य करें। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए प्राचार्य प्रो. राकेश नारायण द्विवेदी ने कहा कि छात्र/छात्रायें भारत राष्ट्र का भविष्य हैं। यदि हम शिक्षकों ने सत्यनिष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता से अध्यापन कार्य कर उनको श्रेष्ठतम नागरिक बनाया तो यह राष्ट्र निर्माण की कड़ी में महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने सभी प्राध्यापकों से प्रभावशाली शिक्षण के माध्यम से युवाओं को स्पर्धा के युग में सफलता प्राप्त करने हेतु तैयार करने का आवाहन किया। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि जो कर्मचारी निष्ठापूर्वक महाविद्यालय द्वारा प्रदत्त कार्यों को पूरा करते हैं वे सदैव जीवन पथ पर उन्नति करते हैं। आईक्यूएसी के संयोजक एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि वैदिककाल से आज तक भारत देश में आचार्य शिक्षकगणों ने अपने ज्ञान, संस्कार एवं श्रेष्ठ विचारों द्वारा समाज को प्रकाशित किया है। हमें आज भी वशिष्ठ, भारद्वाज, अगस्त, सान्दीपनि की आचार्य परम्परा का अनुसरण करते हुए विद्यार्थियों में आचरण एवं ज्ञान का प्रकाश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी महाविद्यालय की प्रतिष्ठा एवं यश वहां के श्रेष्ठ शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं पर निर्भर करती है। उन्होंने महाविद्यालय के कर्मचारियों का आवाह्न किया कि संस्था की गुणवत्ता श्रेष्ठतम बनाने हेतु दृढ़ इच्छाशक्तिपूर्वक कार्य करें। कार्यशाला में प्रो. आशा साहू, प्रो. पंकज शर्मा, हिमांशधर द्विवेदी, जितेन्द्र, डा.मनोज कुमार, अनीता, डा.सुधाकर उपाध्याय, डा.सुभाष जैन, डा.रामकुमार रिछारिया, डा.सजीव शर्मा, डा.सूबेदार यादव, डा.ओ.पी.चौधरी, डा.दीपक पाठक, डा.प्रीति सिरौटिया, श्वेता आनन्द, डा.जितेन्द्र राजपूत, डा.रिचाराज सक्सेना, कविता पैजवार, डा.राजेश तिवारी, डा.रोहित वर्मा, डा.विनोद कुमार, डा.शैलेन्द्र सिंह चौहान, डा.विनीत अग्निहोत्री, डा.अनूप दीक्षित, डा.ऊषा तिवारी, डा.वर्षा साहू, डा. पराग अग्रवाल, डा. अभिलाषा साहू, संदीप श्रीवास्तव, डा. हरीशचंद्र दीक्षित, डा.अवनीश त्रिपाठी, डा.अरिमर्दन सिंह, डा.लक्ष्मीकान्त मिश्रा, डा.बलराम द्विवेदी, डा.जगत कौशिक, डा. संतोष सिह, डा.सुनील शुक्ला, इं. सौरभ श्रीवास्तव, डा.धीरेन्द्र तिवारी, डा.मनीष वर्मा, डा.गीरेन्द्र सिंह, डा.अमित सोनी, डा.राजीव निरंजन, विवेक पाराशर, फहीम बख्श, धु्रव किलेदार, राजीव गोस्वामी, दीपक रावत, अंकित चौबे, रमेश प्रसाद, हरीप्रसाद राजपूत, जयंत चौबे, रामसहाय सिरौठिया, हरदयाल, श्रीपत, भरत सिंह, संजय शर्मा, कामता शर्मा, राकेश, कमलेश, गजेन्द्र आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डा.दीपक पाठक ने किया एवं अंत में डा.ओमप्रकाश शास्त्री ने सभी का आभार जताया।

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